अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। Donald Trump अब पारंपरिक टैरिफ (आयात शुल्क) की जगह एक नए इंपोर्ट टैक्स सिस्टम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। ये निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने उनके पहले लागू किए गए टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया था।
क्या है पूरा मामला?
कुछ समय पहले Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग इस तरह के शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। इसके बाद ट्रंप प्रशासन को आयातकों को वसूला गया पैसा लौटाना पड़ा।
अब इस झटके के बाद ट्रंप एक नई रणनीति के तहत इंपोर्ट टैक्स लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी राजस्व और घरेलू उद्योग दोनों को सुरक्षा मिल सके।
ट्रंप का नया प्लान क्या है?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय दो बड़ी जांच शुरू करने जा रहा है, जिनके आधार पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं:
जबरन श्रम (Forced Labor) की जांच
करीब 60 देशों की जांच की जाएगी, जो अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99% हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य ये देखना है कि क्या ये देश जबरन श्रम से बने उत्पादों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।
अत्यधिक उत्पादन (Overproduction) की जांच
चीन, यूरोपीय संघ और जापान सहित 16 बड़े व्यापारिक साझेदारों की जांच होगी। आरोप है कि ये देश जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है।
सेक्शन 301 का सहारा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप अब 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। इस कानून के तहत टैरिफ दरों पर कोई स्पष्ट सीमा नहीं है और इन्हें लंबे समय तक लागू रखा जा सकता है। पहले भी ट्रंप ने अपने कार्यकाल में चीन के खिलाफ इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए इंपोर्ट टैक्स का सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ेगा। वहीं, आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम बन सकता है।
भारत पर क्या होगा प्रभाव?
अगर नया इंपोर्ट टैक्स लागू होता है, तो भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। पहले ट्रंप प्रशासन भारत पर उच्च टैरिफ लगा चुका है और कड़ा रुख अपना चुका है। ऐसे में संभावना कम है कि नई नीति में भारत को विशेष राहत मिले।
हालांकि, भारत अब अपने निर्यात को विविध बाजारों में फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे अमेरिकी नीतियों का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सके।
ट्रंप का ये नया आर्थिक कदम वैश्विक व्यापार में नई हलचल पैदा कर सकता है। जहां एक ओर अमेरिका अपने उद्योगों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है।
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