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मोमोज खाने से 10 साल की बच्ची का लिवर फेल, किस्मत से बची जान

मोमोज
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राजधानी दिल्ली के बुराड़ी इलाके से एक बेहद चिंताजनक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मोमोज जैसे फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन ने एक 10 वर्षीय बच्ची की जान पर बन आई। इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि समाज को भी बच्चों की खानपान की आदतों को लेकर सतर्क कर दिया है।

बुराड़ी में सामने आया गंभीर मामला

मिली जानकारी के अनुसार, तान्या नाम की 10 साल की बच्ची को लगातार फास्ट फूड खाने की आदत थी। उसके माता-पिता दोनों नौकरीपेशा हैं और दिनभर घर से बाहर रहते थे। ऐसे में बच्ची अपने दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज और अन्य जंक फूड खरीदकर खाती रहती थी। धीरे-धीरे ये आदत उसकी सेहत पर भारी पड़ने लगी।

शुरुआत में दिखे सामान्य लक्षण

शुरुआत में तान्या को हल्के-फुल्के लक्षण महसूस होने लगे। वो छोटी-छोटी बातें भूलने लगी और लगातार थकान महसूस करती थी। परिवार ने पहले इसे सामान्य समझा, लेकिन समय के साथ उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बच्ची को खड़े होने में भी दिक्कत होने लगी।

ICU तक पहुंची हालत

जब तान्या की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत को देखते हुए ICU में शिफ्ट करना पड़ा। जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को गंभीर लिवर फेलियर हो चुका है, जो लंबे समय तक असंतुलित खानपान और जंक फूड के कारण हुआ।

इलाज से मिली राहत

शुरुआत में डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी, जिससे परिवार काफी चिंतित हो गया था। हालांकि बाद में प्लाज्माफेरेसिस तकनीक के जरिए उपचार किया गया। बच्ची को दो यूनिट प्लाज्मा दिया गया, जिससे उसकी हालत में सुधार देखने को मिला और ट्रांसप्लांट की आवश्यकता टल गई।

क्या है प्लाज्माफेरेसिस?

ये एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें खून से हानिकारक तत्वों को निकालकर साफ प्लाज्मा डाला जाता है। इस तकनीक से कई गंभीर बीमारियों में मरीज को राहत मिलती है और स्थिति नियंत्रित की जा सकती है।

बच्चों के खानपान पर ध्यान जरूरी

ये घटना एक बड़ा संकेत है कि बच्चों की खानपान की आदतों पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है। फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, खासकर छोटे बच्चों के लिए।

दिल्ली की ये घटना एक चेतावनी है कि व्यस्त जीवनशैली के बीच भी बच्चों की सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सही खानपान और नियमित निगरानी ही बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।

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