उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में चुनावी माहौल इस समय काफी गर्म है। यहां के कुंडा के राजा, रघुराज प्रताप सिंह, जिन्हें राजा भैया के नाम से भी जाना जाता है, की नाराजगी ने राजनीतिक दलों के बीच एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।
राजा भैया की नाराजगी का कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी, संगम लाल गुप्ता के खिलाफ उनके समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन है। संगम लाल गुप्ता ने एक जनसभा में भावुक होकर कहा कि उनका विरोध सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वे तेली समाज से आते हैं और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेली समाज से कोई सांसद नहीं बन सकता?
इस बयान ने न केवल समाजिक बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है। राजा भैया के समर्थकों का मानना है कि उनके विरोध का ये ब्रह्मास्त्र निशाने पर लगा है या नहीं, ये तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इस घटना ने चुनावी समीकरणों में एक नया मोड़ जरूर ला दिया है।
इस बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी पूरी ताकत से इस सीट पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रही हैं। सपा ने एसपी सिंह पटेल को टिकट दिया है, जिन्हें कुर्मी मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है, और मुस्लिम मतदाता भी उनके साथ हैं। वहीं, बसपा ने प्रथमेश मिश्रा सेनानी को टिकट दिया है, और चर्चा है कि ब्राह्मण मतदाता भी बीजेपी छोड़कर बसपा के साथ जा सकते हैं।
राजा भैया की नाराजगी के पीछे का कारण ये है कि वे अपनी जनसत्ता पार्टी के लिए कौशांबी सीट चाहते थे, लेकिन बीजेपी ने उनके लिए ये सीट नहीं छोड़ी, जिससे वे नाराज हो गए। इस नाराजगी का असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है, और ये बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम से ये स्पष्ट है कि प्रतापगढ़ की लोकसभा सीट पर चुनावी जंग काफी दिलचस्प होने वाली है, और राजनीतिक दलों के लिए यहां के मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती होगी।
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