अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के 11वें दिन मंगलवार को दुनिया ने राहत की पहली सांस ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक लंबी फोन कॉल के बाद ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि पश्चिम एशिया में बारूद का धुआं अब छंट सकता है। हालांकि, कूटनीतिक नरमी के बीच दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अभी भी अपने चरम पर है।
ट्रंप-पुतिन वार्ता: 60 मिनट की बातचीत और 4 घंटे बाद बड़ा बयान
सोमवार को पुतिन और ट्रंप के बीच करीब एक घंटे तक गहन चर्चा हुई। इस बातचीत के करीब 4 घंटे बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने आकर युद्ध समाप्ति की संभावना जताई।
रूस की भूमिका: व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया है कि रूस इस संकट के ‘कूटनीतिक समाधान’ के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है।
ट्रंप का दावा: ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा, “अमेरिकी हमलों ने ईरानी सैन्य तंत्र की कमर तोड़ दी है। कई मायनों में हमने यह युद्ध जीत लिया है।”
“हमारी शर्तें, हमारा समय”: ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान अब समझौते की मेज पर आने को बेताब है। ट्रंप ने कहा:
ईरान ने संकेत दिया है कि वह वार्ता करना चाहता है। लेकिन एक बात साफ है—बातचीत केवल और केवल हमारी शर्तों पर होगी। यह युद्ध लगभग पूरा हो चुका है।”
ईरान के तेवर अभी भी ‘लाल’: “फैसला हम करेंगे”
ट्रंप के ‘जीत’ के दावे के उलट तेहरान से आने वाली आवाजें अभी भी युद्ध की आग को हवा दे रही हैं। ईरान के राजनीतिक नेतृत्व, सैन्य कमांडरों और विदेश मंत्रालय ने एक स्वर में ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है।
ईरान का पलटवार: ईरान ने दो टूक कहा है कि युद्ध की शुरुआत भले ही अमेरिका ने की हो, लेकिन इसका ‘अंत’ कब और कैसे होगा, इसका फैसला केवल ईरान करेगा।
तेहरान की रणनीति: ईरानी विदेश मंत्री ने संकेत दिए हैं कि वे किसी भी ‘एकतरफा’ शर्त पर झुकने को तैयार नहीं हैं।
युद्ध के 11वें दिन की स्थिति: एक नजर में
पक्ष वर्तमान स्थिति / दावा मुख्य रणनीति
अमेरिका युद्ध लगभग जीत लिया है, ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट। अपनी शर्तों पर बातचीत और शांति का दबाव।
रूस कूटनीतिक समाधान का समर्थक। मध्यस्थ बनकर प्रभाव बढ़ाना और तनाव कम करना।
ईरान तेवर बरकरार, हार मानने से इनकार। प्रतिरोध जारी रखना और युद्ध के अंत का समय खुद तय करना।
शांति की उम्मीद या तूफान से पहले की शांति?
ट्रंप और पुतिन की बातचीत ने निश्चित रूप से तनाव कम करने की खिड़की खोली है, लेकिन ईरान का अड़ियल रुख यह बताता है कि शांति की राह अभी भी कांटों भरी है। क्या पुतिन की मध्यस्थता ट्रंप की शर्तों और ईरान के आत्मसम्मान के बीच का रास्ता निकाल पाएगी? पूरी दुनिया की नजरें अब अगले 24 घंटों पर टिकी हैं।































