नई दिल्ली: देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CRPF) को लेकर संसद में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि विभिन्न अर्धसैनिक बलों और असम राइफल्स में 93,139 पद खाली पड़े हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा दी गई यह जानकारी न केवल सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठाती है, बल्कि बलों के भीतर बढ़ते कार्यभार और बदलती परिस्थितियों की ओर भी इशारा करती है।
1. रिक्तियों का लेखा-जोखा: कहाँ कितने पद खाली?
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ी कमी औद्योगिक सुरक्षा और वीवीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले CISF में एक चिंताजनक रुझान का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘इस्तीफों’ (Resignations) की बढ़ती संख्या है। आंकड़ों के अनुसार:
2021 में: 1,255 कर्मियों ने इस्तीफा दिया।
2025 में: यह संख्या बढ़कर 2,333 हो गई।
वृद्धि: पिछले चार वर्षों में इस्तीफों की दर में 86 फीसदी का भारी उछाल आया है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि आत्महत्या और आपसी हत्या (Fratricide) जैसे गंभीर मामलों में कमी दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और अनुशासन पर काम हो रहा है।
3. भर्ती प्रक्रिया में ‘स्मार्ट’ तकनीक का समावेश
सरकार का कहना है कि रिक्तियों के बावजूद बल पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
वार्षिक भर्ती: SSC के माध्यम से कांस्टेबल पदों के लिए नियमित भर्ती परीक्षा।
नोडल बल व्यवस्था: प्रमुख रैंकों की भर्ती के लिए विशेष नोडल एजेंसी का गठन।
RFID तकनीक: शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में पारदर्शिता लाने और समय बचाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (Radio Frequency Identification) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) और कानूनी पेंच
सीएपीएफ कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कर्मियों का मानना है कि ‘अर्धसैनिक’ होने के नाते वे भी सेना की तरह ही समान लाभों के हकदार हैं। यह अनिश्चितता भी युवाओं के बीच इन बलों के प्रति आकर्षण को प्रभावित कर रही है।
समाधान की आवश्यकता
93 हजार से अधिक पदों का खाली होना और इस्तीफों में वृद्धि होना इस बात का संकेत है कि बलों में ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ और करियर स्टेबिलिटी को लेकर काम करने की जरूरत है। हालांकि आधुनिक तकनीक से भर्ती तेज हुई है, लेकिन जब तक पुरानी पेंशन और कठिन ड्यूटी कंडीशंस जैसे बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक इन रिक्तियों को भरना और प्रतिभाओं को रोके रखना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।































