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ट्रंप की ‘टैरिफ वॉर’ 2.0: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद अब भारत-चीन समेत 16 देशों पर ‘अनुचित व्यापार’ की जांच

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान प्रशासन की व्यापारिक नीतियों ने एक बार फिर वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ प्रस्तावों को ‘गैर-कानूनी’ करार देकर रद्द करने के बाद, अब ट्रंप प्रशासन ने एक नया और आक्रामक रास्ता चुना है। ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practices) के बहाने अब भारत और चीन समेत 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार रडार पर हैं।

1. सुप्रीम कोर्ट का झटका और ट्रंप की नई रणनीति

फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे तय कानूनी प्रक्रियाओं और व्यापारिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इस कानूनी हार के बाद, ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब धारा 301 (Section 301) और ‘ओवर-प्रोडक्शन’ (जरूरत से ज्यादा उत्पादन) को हथियार बनाया है।

नया बहाना: सरकार अब यह जांच कर रही है कि क्या भारत, चीन और ईयू जैसे देश अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को अवैध सब्सिडी देकर अमेरिका के साथ ‘अनुचित’ व्यवहार कर रहे हैं।

जांच का दायरा: अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमीसन ग्रीयर के अनुसार, उन देशों को निशाना बनाया जा रहा है जहाँ उत्पादन क्षमता स्थानीय मांग से कहीं अधिक है, जिसे वे अमेरिका में ‘डंप’ कर रहे हैं।

2. जुलाई तक लग सकते हैं नए टैरिफ: कौन-कौन है निशाने पर?

जेमीसन ग्रीयर ने साफ संकेत दिए हैं कि यह केवल कागजी जांच नहीं है। इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा।

प्रमुख देश: चीन, यूरोपीय संघ (EU), भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको।

समय सीमा: जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और जुलाई 2026 तक इन देशों के उत्पादों पर भारी-भरकम नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए जा सकते हैं।

विवाद की जड़: अमेरिका का तर्क है कि इन देशों में कुछ सेक्टर (जैसे स्टील, एल्युमीनियम और इलेक्ट्रॉनिक्स) में जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है, जिससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा है।

3. भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। इस नई जांच के परिणाम गंभीर हो सकते हैं:

निर्यात पर असर: भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और स्टील निर्यात पर टैरिफ की गाज गिर सकती है।

ट्रेड सरप्लस: अमेरिका अक्सर भारत के साथ अपने व्यापार घाटे (Trade Deficit) को लेकर शिकायत करता रहा है, यह जांच उसी दबाव की राजनीति का हिस्सा है।

जवाबी कार्रवाई: यदि अमेरिका टैरिफ लगाता है, तो भारत भी अमेरिकी उत्पादों (जैसे सेब, बादाम और हार्ले डेविडसन बाइक) पर जवाबी शुल्क लगा सकता है, जिससे ‘ट्रेड वॉर’ की स्थिति बन सकती है।

4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर “ट्रंप इफेक्ट”

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को और अधिक अस्थिर कर देगा। एक तरफ ईरान-अमेरिका तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतें अनिश्चित हैं, और दूसरी तरफ इस तरह के व्यापारिक प्रतिबंध वैश्विक मंदी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञ की राय: “यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को फिर से स्थापित करने की कोशिश है, चाहे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को बाईपास करने के नए रास्ते ही क्यों न खोजने पड़ें।”

अनिश्चितता का नया दौर

सुप्रीम कोर्ट से मिली हार को ट्रंप ने अपनी नीतियों का अंत नहीं, बल्कि एक नया मोड़ बना लिया है। जुलाई तक का समय वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। भारत जैसे देशों को अब अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक रणनीतियों को नए सिरे से तैयार करना होगा ताकि ‘टैरिफ की इस नई दीवार’ से अपने हितों की रक्षा की जा सके।

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