महाराष्ट्र

देश का सबसे ऊंचा केबल-स्टे ब्रिज बनकर तैयार! 1 मई से Mumbai-Pune सफर होगा 30 मिनट छोटा

Mumbai-Pune
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Mumbai-Pune के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी गुड न्यूज सामने आई है। लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे यात्रियों को अब राहत मिलने वाली है। Mumbai-Pune एक्सप्रेसवे पर तैयार किया गया बहुप्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट 1 मई से आम वाहनों के लिए खोलने की तैयारी में है।

यात्रा समय में होगी बड़ी कमी

इस नए प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद मुंबई से पुणे के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों का समय लगभग 25 से 30 मिनट तक कम हो जाएगा। खासतौर पर खंडाला घाट सेक्शन में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलेगा, जिससे सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुगम हो जाएगा।

देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज। सह्याद्रि की दो पहाड़ियों के बीच बनाए गए इस ब्रिज की ऊंचाई करीब 182 मीटर है। इस पर से गुजरने वाले वाहन लगभग 132 मीटर की ऊंचाई पर चलेंगे, जो इसे इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण बनाता है।

दूरी में 6 किलोमीटर की कमी

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) द्वारा तैयार किए गए इस 13.3 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के जरिए एक्सप्रेसवे की कुल दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी। पहले खोपोली एग्जिट से सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच की दूरी करीब 19 किलोमीटर थी, जो अब घटकर 13.3 किलोमीटर रह जाएगी।

इस नए मार्ग के बनने से वाहन चालकों को पहाड़ों का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और सीधी सड़क मिलने से यात्रा अधिक तेज हो सकेगी।

प्रोजेक्ट की संरचना और विशेषताएं

‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत कुल 13.3 किलोमीटर मार्ग में से लगभग 11 किलोमीटर लंबी सुरंगें (टनल) बनाई गई हैं, जबकि करीब 2 किलोमीटर हिस्सा केबल स्टे ब्रिज का है।
इसमें दो बड़े केबल ब्रिज और दो सुरंगों का निर्माण शामिल है। लगभग 850 मीटर लंबे और 26 मीटर चौड़े इन ब्रिजों का निर्माण दो चरणों में पूरा किया गया है।

99.9% काम पूरा, अंतिम चरण में प्रोजेक्ट

निर्माण कार्य कर रही कंपनी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का 99.9 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और फिलहाल अंतिम फिनिशिंग का काम जारी है। उम्मीद की जा रही है कि 1 मई तक इसे पूरी तरह से वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।

देरी की वजह

हालांकि इस प्रोजेक्ट को पहले ही पूरा कर लिया जाना था, लेकिन कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों के कारण इसमें देरी हुई। तेज हवाओं, घने कोहरे और भारी बारिश के चलते कई बार काम रोकना पड़ा। खासतौर पर मानसून के दौरान लगभग चार महीने तक निर्माण कार्य बंद रखना पड़ा, जिससे डेडलाइन कई बार आगे बढ़ानी पड़ी।

कुल मिलाकर, मुंबई-पुणे ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। ये प्रोजेक्ट आने वाले समय में लाखों यात्रियों के लिए सुविधा और समय की बचत का बड़ा माध्यम बनेगा।

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