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महाराष्ट्र पुलिस में बड़ा ‘शुद्धिकरण’ अभियान: दागी अफसरों की नो-एंट्री, अब सिर्फ ‘क्लीन इमेज’ वाले जांबाज ही संभालेंगे क्राइम ब्रांच की कमान!

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मुंबई: राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक गेम-चेंजर फैसला लिया है। हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच और पुलिस विभाग की साख पर उठते सवालों के बीच, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) की नियुक्तियों को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब ‘मलाईदार’ पोस्टिंग के लिए पैरवी नहीं, बल्कि स्वच्छ छवि और अनुभव ही एकमात्र पैमाना होगा।

क्यों पड़ी इस सख्त फैसले की जरूरत?
हाल के दिनों में कई बड़े और हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली और कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका के कारण विभाग की छवि धूमिल हुई थी। विपक्ष के हमलों और जनता के गिरते भरोसे को बहाल करने के लिए गृह विभाग ने यह ‘फिल्ट्रेशन’ प्रक्रिया शुरू की है।

* साख का सवाल: लोकल क्राइम ब्रांच किसी भी जिले की पुलिस की ‘रीढ़’ मानी जाती है। यहाँ भ्रष्टाचार या अक्षमता का सीधा असर पूरे महकमे की साख पर पड़ता है।
* मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश: गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो-टूक कहा है कि अब “जुगाड़” से क्राइम ब्रांच में एंट्री के दिन लद गए हैं।

नए आदेश के मुख्य बिंदु: क्या बदलेगा?
गृह विभाग द्वारा जारी नई नीति के अनुसार, क्राइम ब्रांच में नियुक्तियों के लिए अब एक कठोर चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी:

* छवि की जांच (Clean Track Record): जिस अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, विभागीय जांच या किसी गंभीर अपराध का मामला लंबित होगा, उसे क्राइम ब्रांच से दूर रखा जाएगा।
* अनुभव को प्राथमिकता: केवल उन्हीं अधिकारियों को यहाँ जगह मिलेगी जिनका पिछले वर्षों का ‘डिलीवरी रेट’ (केस सॉल्व करने की क्षमता) उत्कृष्ट रहा हो।
* जवाबदेही तय: यदि किसी अधिकारी की नियुक्ति के बाद उसकी छवि संदिग्ध पाई जाती है, तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारी (जिसने सिफारिश की थी) से भी जवाब तलब किया जा सकता है।

‘मलाईदार पोस्टिंग’ के सिंडिकेट पर चोट
पुलिस महकमे में यह चर्चा आम रहती है कि क्राइम ब्रांच जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में नियुक्तियों के लिए राजनीतिक दबाव या आर्थिक लेन-देन का सहारा लिया जाता है। सरकार के इस फैसले से उस ‘सिंडिकेट’ को बड़ा झटका लगा है जो पैरवी के दम पर महत्वपूर्ण कुर्सियां हथिया लेते थे।

अधिकारी का बयान: “मुख्यमंत्री का आदेश स्पष्ट है—हमें ‘रिजल्ट’ चाहिए, ‘रिलेशन’ नहीं। क्राइम ब्रांच को राज्य की सबसे विश्वसनीय जांच एजेंसी के रूप में पुनर्जीवित करना हमारा लक्ष्य है।”

जनता का बढ़ेगा भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल अपराधों की गुत्थी जल्दी सुलझेगी, बल्कि आम जनता में भी यह संदेश जाएगा कि सरकार पुलिसिंग में पारदर्शिता को लेकर गंभीर है। पेशेवर और ईमानदार अधिकारियों को आगे लाने से पुलिस बल का मनोबल भी बढ़ेगा।

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