धुले, महाराष्ट्र: बढ़ते ईंधन संकट और वैश्विक परिस्थितियों के बीच महाराष्ट्र के धुले जिले के तीन गांव – बारीपाड़ा, मोहगांव और चावड़ीपाड़ा ने एक अनोखा और सराहनीय निर्णय लिया है। इन गांवों के लोगों ने सर्वसम्मति से तय किया है कि वे अगले 6 महीनों तक LPG गैस सिलेंडर का उपयोग पूरी तरह बंद रखेंगे।
हाल के दिनों में खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ रहे असर का प्रभाव भारत में भी साफ दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जबकि LPG की कमी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में धुले के इन गांवों ने ईंधन बचत और देशहित को प्राथमिकता देते हुए ये बड़ा कदम उठाया है।
इस फैसले को लेकर तीनों गांवों में विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरपंच, उपसरपंच, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में “देश का हित सर्वोपरि” की भावना के साथ इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
अब इन गांवों के लोग पारंपरिक तरीकों की ओर लौटेंगे और खाना बनाने के लिए LPG गैस के बजाय लकड़ी, गोबर और पारंपरिक चूल्हों का उपयोग करेंगे। हालांकि, स्वास्थ्य और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए धुआं रहित चूल्हों और इको-फ्रेंडली ईंधन के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए गांव स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं और कुछ स्थानों पर सामूहिक कुकिंग सेंटर स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
ग्रामीणों का मानना है कि शहरों में वैकल्पिक ईंधन के विकल्प सीमित होते हैं, इसलिए गांवों से इस तरह की पहल शुरू करना अधिक जरूरी है। उन्होंने इस फैसले को देश के लिए एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण त्याग बताया है।
वैश्विक ईंधन संकट के इस दौर में धुले के इन तीन गांवों का ये कदम न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। ये पहल दिखाती है कि सामूहिक सोच और जिम्मेदारी के साथ बड़े बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।
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