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महाराष्ट्र की सियासत में ‘संकल्पित’ संग्राम: राकांपा (अजित) का रोहित पवार पर हमला, ‘5 करोड़ के सुपारी’ का आरोप

रोहित पवार
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महाराष्ट्र की राजनीति उस समय फिर से गरमा गई जब राकांपा (अजित) के पूर्व वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद शुरू हुए विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया। जहां रोहित पवार इस हादसे की निष्पक्ष जांच और संदेहों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं राकांपा (अजित) ने उन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने दावा किया है कि रोहित पवार पार्टी को बदनाम करने के लिए ‘पेड कैंपेन’ चला रहे हैं।

1. 5 करोड़ का ‘बदनाम पैकेज’ और एजेंसी का खेल
राकांपा (अजित) के मुख्य प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राकांपा (शरद) के विधायक रोहित पवार ने उनकी पार्टी में फूट डालने और नेताओं की छवि खराब करने के लिए एक पीआर (PR) एजेंसी को 5 करोड़ रुपये का पैकेज दिया है।

* सैलरी पर रखे ‘ट्रोल्स’: चव्हाण का आरोप है कि कुछ लोगों को बाकायदा वेतन देकर इस काम के लिए नियुक्त किया गया है कि वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से राकांपा (अजित) के खिलाफ झूठा प्रचार करें।
* फूट डालने की कोशिश: आरोप के अनुसार, इस भारी भरकम रकम का उद्देश्य पार्टी के वर्तमान नेताओं के बीच अविश्वास पैदा करना और संगठन को अस्थिर करना है।

2. हादसे पर सवाल बनाम आरोपों की राजनीति
अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से ही रोहित पवार लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने इस हादसे की परिस्थितियों को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की थी।

* विपक्ष का रुख: रोहित पवार और राकांपा (शरद गुट) का तर्क है कि वे केवल सच जानना चाहते हैं और यह राज्य के एक बड़े नेता की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
* सत्ता पक्ष का पलटवार: सूरज चव्हाण ने पलटवार करते हुए कहा कि रोहित पवार और उनकी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने के बजाय केवल राकांपा (अजित) को निशाना बनाने में अपनी ऊर्जा और पैसा बर्बाद कर रही है।

3. सियासी समीकरण: आरोपों के गहरे मायने
रोहित पवार (शरद गुट) विमान हादसे की जांच और सुरक्षा चूक पर गंभीर सवाल।
सूरज चव्हाण (अजित गुट) | ₹5 करोड़ देकर पार्टी को बदनाम करने और फूट डालने की साजिश।

मुख्य मुद्दा संगठन पर नियंत्रण और सहानुभूति की राजनीति।
4. क्या यह सहानुभूति की जंग है?
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है। दोनों गुटों के बीच जारी यह जुबानी जंग संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा। एक तरफ जहां शरद पवार गुट इस हादसे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं अजित पवार का गुट अब ‘आक्रामक बचाव’ की मुद्रा में है।

सूरज चव्हाण द्वारा लगाया गया ‘5 करोड़ का पैकेज’ वाला आरोप यदि तूल पकड़ता है, तो इसकी जांच की मांग भी उठ सकती है। फिलहाल, महाराष्ट्र की जनता इस बात से स्तब्ध है कि एक दुखद हादसे के बाद भी राजनीति के केंद्र में ‘जांच’ से ज्यादा ‘एजेंसी और पैकेज’ जैसे शब्द हावी हैं।

क्या रोहित पवार इन आरोपों का कानूनी जवाब देंगे या यह चुनावी साल की एक और ‘राजनीतिक बयानबाजी’ बनकर रह जाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

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