महाराष्ट्र

मेट्रो की ‘क्रेडिट वॉर’: दहिसर-भायंदर कॉरिडोर का उद्घाटन कल, पर श्रेय लेने की होड़ में आमने-सामने आए सत्ताधारी ‘मित्र’

मेट्रो
Image Source - Web

मुंबई के उपनगरों की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो सेवा का अब विस्तार होने जा रहा है। अंधेरी-दहिसर मेट्रो मार्ग के विस्तार के क्रम में दहिसर-भायंदर मेट्रो कॉरिडोर-9 के पहले चरण का भव्य उद्घाटन शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों संपन्न होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर दोनों उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। लेकिन, विकास के इस उत्सव से पहले सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ही ‘श्रेय लेने की जंग’ छिड़ गई है, जिसने नागरिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

बीजेपी बनाम शिवसेना (शिंदे): होर्डिंग की होड़
मेट्रो के उद्घाटन से पहले मीरा-भायंदर की सड़कों पर राजनीतिक घमासान साफ देखा जा सकता है। सत्ताधारी दल भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच खुद को ‘मेट्रो मैन’ साबित करने की होड़ लगी है। जहां एक ओर भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता मेट्रो लाने का श्रेय खुद को दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिवसेना के विधायक और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक इसे अपनी पार्टी की उपलब्धि बता रहे हैं। दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए विशाल होर्डिंग्स ने शहर को पाट दिया है।

नरेंद्र मेहता का दावा: “मेट्रो का विचार और निर्णय भाजपा का”
भाजपा नेता नरेंद्र मेहता ने तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखते हुए दावा किया है कि इस मेट्रो विस्तार की नींव उन्होंने ही रखी थी। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

* नगरपालिका का निर्णय: मेहता के अनुसार, वर्ष 2015 में जब राज्य और मीरा-भायंदर मनपा दोनों जगह भाजपा की सत्ता थी, तब मेट्रो लाने का आधिकारिक निर्णय मनपा की आमसभा में लिया गया था।
* मुख्यमंत्री का भरोसा: अक्टूबर 2017 में मीरा रोड की एक सभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दहिसर-अंधेरी मेट्रो को भायंदर तक विस्तार देने का सार्वजनिक भरोसा दिया और बाद में इसे मंजूरी भी दी।
* प्रतीकात्मक उपहार: मेहता ने याद दिलाया कि इस उपलब्धि के लिए जब वे शिष्टमंडल लेकर मंत्रालय पहुंचे, तब सदन में मुख्यमंत्री ने उन्हें ‘खिलौने के आकार की मेट्रो’ उपहार स्वरूप भेंट की थी, जो उनके प्रयासों की पुष्टि करता है।

नागरिकों में ‘क्रेडिट पॉलिटिक्स’ को लेकर भ्रम
एक तरफ मेहता अपने पुराने प्रयासों को गिना रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रताप सरनाईक के समर्थक इसे मौजूदा सरकार और शिवसेना की सक्रियता का परिणाम बता रहे हैं। विकास कार्यों के उद्घाटन से पहले शुरू हुई इस ‘पोस्टर वॉर’ ने आम जनता को दुविधा में डाल दिया है कि आखिर इस परियोजना का असली सारथी कौन है?

मेट्रो कॉरिडोर-9: एक नज़र में
* मार्ग: दहिसर से भायंदर (मेट्रो लाइन 7 का विस्तार)
* उद्घाटन: शुक्रवार (मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा)
* महत्व: यह मार्ग दहिसर और मीरा-भायंदर के बीच यात्रा के समय को आधे से भी कम कर देगा।

विकास की पटरी पर दौड़ती मेट्रो भले ही शुक्रवार से यात्रियों के लिए खुल जाएगी, लेकिन इसके ‘क्रेडिट’ की पटरी पर भाजपा और शिवसेना के बीच की खींचतान फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि श्रेय चाहे जिसे मिले, क्या उन्हें ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति मिलेगी?

ये भी पढ़ें: भारतीय सड़कों पर ‘रफ्तार’ का नया रिकॉर्ड: साल भर में बिकीं 47 लाख कारें, अब हैचबैक नहीं… SUVs की दीवानी हुई दुनिया!

You may also like