महाराष्ट्र

‘हैवान’ खरात का खौफनाक चेहरा: यौन शोषण के बाद जबरन गर्भपात, अब 8 अप्रैल तक पुलिस रिमांड में खुलेगा ‘डॉक्टर कनेक्शन’!

खरात
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फर्जी कैप्टन अशोक खरात के काले कारनामों की फेहरिस्त हर बीतते दिन के साथ लंबी और अधिक वीभत्स होती जा रही है। गुरुवार को नासिक कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (SIT) ने जो खुलासे किए, उसने न केवल कानून के जानकारों बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है।

गर्भपात की गोलियों का ‘खूनी’ सुराग
SIT ने अदालत को सूचित किया कि खरात ने न केवल पीड़िता का लंबे समय तक यौन शोषण किया, बल्कि जब वह गर्भवती हुई, तो उसे डरा-धमकाकर गर्भपात (Abortion) की दवाएं दीं। पुलिस अब इस मामले में ‘मेडिकल नेक्सस’ की जांच कर रही है। आखिर वे दवाएं किस मेडिकल स्टोर से लाई गईं? क्या इसमें कोई पेशेवर डॉक्टर शामिल था? और क्या इससे पहले भी अन्य पीड़िताओं के साथ ऐसा क्रूर कृत्य किया गया है? इन सवालों के जवाब खोजने के लिए पुलिस खरात को गहन पूछताछ के दायरे में लेगी।

सुरक्षा के मद्देनजर ‘डिजिटल पेशी’
अशोक खरात के प्रति जनता में व्याप्त भारी आक्रोश और कोर्ट परिसर में संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। खरात को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट लाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पेश किया गया। अदालत कक्ष में चार बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से सुनवाई हुई, जहाँ दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं।

8 अप्रैल तक मिली पुलिस कस्टडी
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि खरात के अपराधों की जड़ें बहुत गहरी हैं और गर्भपात की गोलियों वाले नए मोड़ ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बचाव पक्ष की आपत्तियों के बावजूद, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अशोक खरात को 8 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

मामले के मुख्य बिंदु: एक नजर में
घटनाक्रम विवरण
नया खुलासा पीड़िता को जबरन गर्भपात की दवाएं दी गईं।
जांच का केंद्र दवाएं देने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टोर्स की पहचान।
कोर्ट का आदेश 8 अप्रैल तक पुलिस रिमांड स्वीकृत।
सुनवाई का तरीका वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (सुरक्षा कारणों से)

आगामी जांच की दिशा
SIT अब खरात के मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन (जैसा कि 130 फर्जी खातों का मामला सामने आया है) और उसके संपर्क में रहे संदिग्ध डॉक्टरों की कुंडली खंगाल रही है। माना जा रहा है कि 8 अप्रैल तक की इस कस्टडी में खरात के कई और ‘सफेदपोश’ मददगारों के नाम सामने आ सकते हैं।

अशोक खरात मामला अब महज एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित शोषण और फर्जीवाड़े का जाल बनता जा रहा है। नासिक पुलिस और SIT की इस कार्रवाई पर अब पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हैं, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा हो।

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