करीब 45 दिनों के लंबे इंतजार के बाद Hormuz Strait को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। इस महत्वपूर्ण फैसले से भारत समेत पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है और भारत अपनी तेल व गैस जरूरतों के लिए इस पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में इसका फिर से खुलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
Hormuz Strait खुलते ही भारत के लिए 41 जहाज आगे बढ़ने को तैयार हैं, जिनमें कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी संसाधन लदे हुए हैं। इन जहाजों में 26 विदेशी और 15 भारतीय जहाज शामिल हैं। खास बात ये है कि एक दर्जन से अधिक जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं, जो देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि आने वाले महीनों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होने वाली है। भारतीय जहाजों में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी लोड किया गया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को भी मजबूती मिलेगी।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था। इसके चलते वैश्विक बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिली, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और करीब एक तिहाई गैस इसी रास्ते से गुजरती है। इस वजह से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था और कई देशों को संकट का सामना करना पड़ा था।
अब जब Hormuz Strait फिर से खुल गया है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड में उल्लेखनीय गिरावट आई है और ये 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान इससे भी नीचे गया। इसी तरह अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी तेज गिरावट देखी गई। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में आई ये गिरावट बाजार में स्थिरता लौटने का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर शिपिंग और फ्रेट लागत पर भी पड़ेगा, जिससे आयात और निर्यात दोनों सस्ते हो सकते हैं।
Hormuz Strait के खुलने से भारतीय निर्यातकों को भी नई उम्मीद मिली है। पश्चिम एशिया से मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, वहीं यूरोप तक सामान पहुंचाने का रास्ता भी अब छोटा हो जाएगा। हाल के तनाव के कारण कई भारतीय बंदरगाहों पर सामान फंसा हुआ था, जिसमें बड़ी मात्रा में बासमती चावल भी शामिल है। अब ये सामान अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा, जिससे व्यापार को गति मिलेगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कई जहाज अभी भी भारतीय बंदरगाहों पर मिडिल ईस्ट के लिए रवाना होने का इंतजार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। आमतौर पर होर्मुज के पश्चिमी हिस्से से भारत तक जहाजों को पहुंचने में चार से छह दिन का समय लगता है, इसलिए जल्द ही सप्लाई चेन पूरी तरह बहाल होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, Hormuz Strait का दोबारा खुलना भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम होगा, तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता आएगी, कृषि क्षेत्र को जरूरी फर्टिलाइजर समय पर मिल सकेगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी।
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