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₹69,000 बेसिक सैलरी और डबल इंक्रीमेंट, केंद्रीय कर्मचारियों ने आठवें वेतन आयोग के आगे रखी बड़ी डिमांड

आठवें वेतन आयोग

केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने आगामी आठवें वेतन आयोग के लिए अपनी मांगों को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों में व्यापक बदलाव की बात कही गई है। ये मांग केवल सैलरी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कर्मचारियों के करियर, पारिवारिक सुविधाओं और रिटायरमेंट लाभों को भी शामिल किया गया है।

बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने का सुझाव दिया गया है, जो वेतन निर्धारण का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। वर्तमान में सातवें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू है, जिसके आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 18,000 रुपये के आसपास तय हुई थी। नए प्रस्ताव के अनुसार, इस फैक्टर में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आ सकता है।

महंगाई भत्ता में बदलाव की है मांग
कर्मचारी संगठनों ने ये भी सुझाव दिया है कि महंगाई भत्ता जब 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए, तो उसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए। ये व्यवस्था पहले भी लागू रही है और इससे वेतन संरचना को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा सालाना वेतन वृद्धि यानी इंक्रीमेंट को भी बढ़ाने की मांग की गई है। वर्तमान में ये दर 3 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आय में संतुलन बना रहे।

पदोन्नति को सरल बनाने की मांग
सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि पदों की संरचना में सुधार की मांग भी इस प्रस्ताव का हिस्सा है। कर्मचारियों का मानना है कि मौजूदा पे-मैट्रिक्स में कई स्तर ऐसे हैं जो प्रमोशन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। इसलिए इन स्तरों को कम करके पदोन्नति को सरल और तेज बनाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों के करियर ग्रोथ में आने वाली बाधाएं कम हो सकें।

परिवार की सुविधा भी जरूरी
इसके साथ ही कर्मचारियों ने पारिवारिक सुविधाओं को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए हैं। उन्होंने पितृत्व अवकाश को बेहतर बनाने, परिवार की परिभाषा में पांच सदस्यों को शामिल करने और सरोगेसी या गोद लेने के माध्यम से माता-पिता बनने वाले कर्मचारियों को भी उचित अवकाश देने की मांग की है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कार्यस्थल पर संतुलन और कर्मचारियों के पारिवारिक जीवन को बेहतर बनाना है।

पेंशनभोगियों को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी गई है। कर्मचारियों ने आग्रह किया है कि पुराने रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी नए वेतनमान का पूरा लाभ दिया जाए, ताकि सभी पेंशनभोगियों के बीच समानता बनी रहे। ये मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है और इस बार इसे प्रमुखता से उठाया गया है।

बताया जा रहा है कि इन प्रस्तावों का सीधा असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है। इस तरह कुल मिलाकर 1.15 करोड़ से अधिक लोग इन बदलावों से प्रभावित होंगे।

फिटमेंट फैक्टर की बात करें तो ये वेतन आयोग द्वारा तय किया जाने वाला एक गुणांक होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा कर नई सैलरी निर्धारित की जाती है। यदि प्रस्तावित 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर, आठवें वेतन आयोग के सामने रखी गई ये मांगें केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे और सुविधाओं में बड़े बदलाव का संकेत देती हैं। अब ये देखना होगा कि सरकार इन सुझावों पर कितना विचार करती है और आने वाले समय में कर्मचारियों को कितनी राहत मिलती है।

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