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सहारा इंडिया पर EPFO का बड़ा एक्शन, ₹1204 करोड़ की रिकवरी प्रक्रिया शुरू, चल और अचल संपत्तियां होंगी कुर्क

सहारा इंडिया

देश की प्रमुख वित्तीय संस्था सहारा इंडिया के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने बड़ा कदम उठाया है। ये कार्रवाई कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) के बकाया भुगतान को लेकर की गई है। EPFO ने सहारा इंडिया से कुल ₹1204 करोड़ की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कई वर्षों से लंबित था PF बकाया

जानकारी के अनुसार, सहारा इंडिया की विभिन्न इकाइयों द्वारा कर्मचारियों का PF जमा नहीं किया गया था, जो लंबे समय से बकाया था। इसको लेकर EPFO ने अप्रैल 2021 से अप्रैल 2023 के बीच कई रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी किए थे। ये सर्टिफिकेट उन इकाइयों के खिलाफ जारी किए गए जो EPF अधिनियम के तहत आती हैं।

₹1179 करोड़ का सबसे बड़ा दावा

रिकवरी प्रक्रिया के तहत कुल चार बड़े दावे शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ा दावा ₹1179 करोड़ से अधिक का है। इसके अलावा अन्य दावे ₹31 लाख से लेकर ₹23 करोड़ तक के हैं। इन सभी मामलों को मिलाकर कुल बकाया राशि ₹1204 करोड़ तक पहुंच गई है।

संपत्तियों की कुर्की और नीलामी के आदेश

EPFO ने अपने रिकवरी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सहारा इंडिया की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करें। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों की नीलामी भी की जाएगी, ताकि बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सके। यह कार्रवाई विशेष रूप से लखनऊ स्थित संपत्तियों को ध्यान में रखकर की जा रही है।

कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

EPF अधिनियम की धारा 11(2) के तहत कर्मचारियों के PF पर पहला अधिकार उन्हीं का होता है। इसका मतलब है कि यदि सहारा इंडिया की संपत्तियों की बिक्री होती है, तो उससे मिलने वाली राशि का उपयोग सबसे पहले कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए किया जाएगा।

हजारों कर्मचारियों को मिलेगी राहत

EPFO की इस सख्त कार्रवाई से उन हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका PF का पैसा वर्षों से सहारा इंडिया के पास अटका हुआ है। ये कदम कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सहारा इंडिया के खिलाफ EPFO की यह कार्रवाई न केवल बकाया वसूली के लिए अहम है, बल्कि ये कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा का भी मजबूत उदाहरण है। आने वाले समय में इस प्रक्रिया के तहत और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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