मुंबई

थाईलैंड से भारत लाया गया साइबर ठग गणेश बालासो काले, मुंबई एयरपोर्ट पर हुआ गिरफ्तार

गणेश बालासो काले

भारत की जांच एजेंसियों को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। साइबर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में वांछित आरोपी गणेश बालासो काले को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है। मुंबई पहुंचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी लंबे समय से फरार था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA) तथा बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से इस पूरे अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए समन्वय और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद आरोपी को भारत वापस लाया गया।

ऑनलाइन नौकरी का झांसा देकर करता था ठगी

जांच एजेंसियों के अनुसार, गणेश बालासो काले लोगों को ऑनलाइन पार्ट-टाइम नौकरी और अतिरिक्त कमाई का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। वो पीड़ितों को निवेश करने के लिए प्रेरित करता और अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाकर उनसे बड़ी रकम जमा करवाता था।

जब लोग उसके नेटवर्क में पैसा लगाते थे, तब आरोपी और उसके साथी धनराशि लेकर गायब हो जाते थे। इस तरह उसने कई लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और एक संगठित साइबर वित्तीय अपराध नेटवर्क तैयार किया।

म्यूल अकाउंट्स के जरिए चलाता था अवैध लेन-देन

CBI के मुताबिक आरोपी बैंक खातों का दुरुपयोग कर अवैध धन हस्तांतरण की गतिविधियां संचालित करता था। वो लोगों को उनके बैंक खाते इस्तेमाल करने के बदले ब्याज या कमीशन देने का लालच देता था।

इन खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और अपराध के सबूत छिपाने के लिए किया जाता है। जांच में ये भी सामने आया कि आरोपी अपने साथियों को फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के निर्देश देता था, जिससे साइबर अपराध को अंजाम देना आसान हो सके।

इंटरपोल रेड नोटिस के बाद बैंकॉक में हुई गिरफ्तारी

गणेश बालासो काले के खिलाफ मई 2026 में इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसके आधार पर थाईलैंड की पुलिस ने 24 मई 2026 को बैंकॉक में उसे गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद भारतीय और थाई अधिकारियों के बीच तेजी से समन्वय स्थापित किया गया। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मात्र 20 दिनों के भीतर आरोपी को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जांच सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

मुंबई पहुंचते ही साइबर सेल ने लिया हिरासत में

11 जून को आरोपी को भारत लाया गया। मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। अब उससे पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क और कई अन्य मामलों का खुलासा हो सकता है।

‘भारतपोल’ प्लेटफॉर्म ने निभाई अहम भूमिका

सीबीआई ने इस पूरे अभियान में “भारतपोल” प्लेटफॉर्म के माध्यम से इंटरपोल चैनलों का उपयोग किया। भारतपोल एक ऐसा तंत्र है जो भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और इंटरपोल के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करता है।

सीबीआई भारत में इंटरपोल की राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (NCB) के रूप में कार्य करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधियों की तलाश, गिरफ्तारी तथा प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

160 से अधिक अपराधियों को भारत ला चुकी है CBI

सीबीआई के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के सहयोग से 160 से अधिक वांछित अपराधियों को विदेशों से भारत वापस लाया जा चुका है। गणेश बालासो काले का प्रत्यर्पण भी इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच ये कार्रवाई एक साफ संदेश देती है कि विदेश भाग जाने के बावजूद अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए उन्हें न्याय के दायरे में लाया जा सकता है।

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