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रूस से सस्ता तेल खरीदना पड़ सकता है महंगा, अमेरिकी सीनेट में 100% टैरिफ बिल हुआ पास

टैरिफ

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी सीनेट ने ‘Sanctioning Russia and Iran Act, 2026’ से जुड़े प्रस्ताव को 86-11 वोट से पारित किया है। प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है।

हालांकि, ये अभी कानून नहीं बना है। इसे आगे अमेरिकी House of Representatives में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही ये लागू हो सकेगा।

भारत पर क्यों पड़ सकता है असर?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। रूस से मिलने वाले तेल की कीमत कई मौकों पर अन्य विकल्पों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रही है। इसी वजह से भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूसी तेल का आयात बढ़ाया है।

Kpler के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर करीब 27.8 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। ये भारत के कुल क्रूड आयात का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा बताया गया है।

अगर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ लागू होता है, तो भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में लागत और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ने की आशंका है।

चीन समेत कई देशों पर भी नजर

अमेरिका का ये प्रस्ताव केवल भारत को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले चीन समेत अन्य देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इस प्रस्ताव के पीछे अमेरिकी नीति का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बनाना और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है।

बिल किसने पेश किया?

इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया है। इसमें रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

सीनेट में 86 सांसदों के समर्थन से पारित होना इस प्रस्ताव को लेकर दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों के बीच व्यापक समर्थन का संकेत देता है।

भारत के लिए आगे क्या चुनौती?

भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी बाजार के बीच संतुलन का है। रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है, जबकि अमेरिका भी भारत का एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार है।

यदि 100 फीसदी टैरिफ वाला प्रावधान कानून बनता है और भारत पर लागू किया जाता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों, लागत और अमेरिका में उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ सकता है।

हालांकि, फिलहाल इसे अंतिम कानून नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए भारत पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम कानून में क्या प्रावधान रखे जाते हैं और अमेरिकी प्रशासन इसे किस तरह लागू करता है।

फिलहाल भारत के लिए स्थिति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध – दोनों ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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