महाराष्ट्र के Food and Drug Administration यानी FDA में कामकाज के तरीके को लेकर विवाद सामने आया है। छत्रपति संभाजीनगर स्थित FDA की प्रयोगशाला के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आयुक्त तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) की कार्यशैली को लेकर राज्य के FDA मंत्री नरहरी झिरवाल से शिकायत की थी। कर्मचारियों ने दो शिफ्ट में काम, छुट्टियों में ड्यूटी और कर्मचारियों की कमी को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
वहीं, तुकाराम मुंढे ने कर्मचारियों की इन मांगों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि FDA की प्रयोगशालाएं सामान्य सरकारी कार्यालयों की तरह केवल सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाली व्यवस्था नहीं हैं। जरूरत के अनुसार इन्हें 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित किया जा सकता है।
29 कर्मचारियों ने मंत्री से की थी शिकायत
इस विवाद की शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर की FDA प्रयोगशाला के अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायत से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 29 कर्मचारियों ने FDA मंत्री नरहरी झिरवाल को लिखित शिकायत देकर नई कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी। शिकायत में दो शिफ्ट में काम कराने, शनिवार-रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में ड्यूटी लगाने तथा कर्मचारियों की कमी के कारण बढ़ते कार्यभार का मुद्दा उठाया गया।
कर्मचारियों का कहना था कि लगातार बढ़ते काम और पर्याप्त मानव संसाधन नहीं होने की स्थिति में प्रयोगशाला में होने वाली जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से पहले की कार्यालयीन व्यवस्था बहाल करने और पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग भी की।
कर्मचारियों की क्या थी मांग?
कर्मचारियों की मुख्य मांग थी कि प्रयोगशालाओं में सामान्य सरकारी कार्यालयों की तरह निर्धारित समय के अनुसार काम कराया जाए और शनिवार-रविवार समेत साप्ताहिक अवकाश की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए।
शिकायत में ये भी कहा गया कि दो शिफ्ट में काम करने और अतिरिक्त ड्यूटी के कारण कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। साथ ही, रिक्त पदों के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ रही है।
तुकाराम मुंढे ने क्यों किया विरोध?
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) का कहना है कि खाद्य और दवा की जांच करने वाली प्रयोगशाला की भूमिका सामान्य सरकारी दफ्तर से अलग है। ऐसी प्रयोगशालाओं में नमूनों की जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को आवश्यकता के अनुसार लगातार संचालित करना जरूरी है।
मुंढे के मुताबिक इसका अर्थ ये नहीं है कि किसी कर्मचारी से लगातार 24 घंटे काम कराया जाएगा। कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट के आधार पर तय की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी से निर्धारित समय के अनुसार ही काम लिया जाता है और साप्ताहिक कार्य घंटे तय सीमा के भीतर रखे जाते हैं।
‘जरूरत पड़ी तो सातों दिन चलेगी लैब’
तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) ने साफ किया है कि मौजूदा व्यवस्था जरूरत के अनुसार आगे और बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल दो शिफ्ट में काम हो रहा है, लेकिन अगर काम का दबाव बढ़ता है तो प्रयोगशाला को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन चलाया जा सकता है।
उनका तर्क है कि खाद्य और दवा से जुड़े नमूनों की जांच में देरी सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रयोगशाला को केवल पारंपरिक सरकारी कार्यालय के समय तक सीमित रखना उचित नहीं होगा।
‘सरकार के नियमों के अनुसार काम नहीं करना है तो इस्तीफा दें’
कर्मचारियों की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) ने कथित तौर पर बेहद सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी शासन के नियमों और विभाग की जरूरत के अनुसार काम नहीं करना चाहते, तो वे इस्तीफा देकर जा सकते हैं।
मुंढे का कहना है कि विभाग का उद्देश्य जनता को बेहतर और समय पर खाद्य एवं औषधि सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए कर्मचारियों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जिम्मेदारी निभानी होगी।
FDA में बढ़ा है जांच का काम
तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) के FDA आयुक्त बनने के बाद महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ विभाग की कार्रवाई तेज हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक जून 2026 में FDA ने पिछले साल की तुलना में खाद्य नमूनों की जांच में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। विभाग के पास बड़ी संख्या में लंबित नमूने थे, जिनकी जांच तेज करने पर जोर दिया गया।
इसी बढ़े हुए काम के बीच प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने और शिफ्ट व्यवस्था लागू करने को लेकर कर्मचारियों और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए हैं।
विवाद का असली मुद्दा क्या है?
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मानव संसाधन की कमी और बढ़ते कार्यभार के बीच काम के घंटे बढ़ाने से उन पर दबाव बढ़ रहा है और जांच की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
दूसरी ओर, FDA प्रशासन का कहना है कि प्रयोगशालाओं को जरूरत के अनुसार शिफ्ट में संचालित करना जरूरी है और इसका मतलब कर्मचारियों से लगातार अतिरिक्त घंटे काम कराना नहीं है।
ऐसे में आने वाले दिनों में ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कर्मचारियों की शिकायत और FDA प्रशासन के रुख के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
क्या है निष्कर्ष?
फिलहाल विवाद FDA प्रयोगशालाओं की शिफ्ट व्यवस्था, कार्यभार और साप्ताहिक अवकाश को लेकर है। तुकाराम मुंढे ने प्रयोगशालाओं को जरूरत के अनुसार 24×7 संचालित करने की बात कही है, जबकि कर्मचारियों ने काम के दबाव और पर्याप्त स्टाफ नहीं होने की शिकायत की है।
यानी मामला सिर्फ छुट्टी का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में खाद्य और दवा सुरक्षा जांच की क्षमता बढ़ाने तथा कर्मचारियों की कार्यस्थितियों के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है।
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