मुंबई की लोकल ट्रेनों में टिकट जांच व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिविजन ने नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों और टिकट चेकिंग स्टाफ यानी टीसी के बीच होने वाली बहस, विवाद और मारपीट की घटनाओं को देखते हुए टिकट जांच कर्मचारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे और खास डिजाइन की जैकेट दी जाएगी।
ये व्यवस्था फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही है। इसके तहत 15 बॉडी कैमरे और 30 विशेष जैकेट उपलब्ध कराई जाएंगी। शुरुआत में एसी लोकल ट्रेनों में टिकट जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
टिकट जांच के दौरान रिकॉर्ड होगी पूरी बातचीत
बॉडी-वॉर्न कैमरे का सबसे बड़ा उद्देश्य टिकट जांच के दौरान होने वाली घटनाओं की रिकॉर्डिंग करना है। कैमरा टीसी की जैकेट के सामने लगाया जाएगा, जिससे यात्रियों और टिकट जांच कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत और घटनाओं को रिकॉर्ड किया जा सके।
कैमरे में एसडी कार्ड आधारित रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ माइक्रोफोन की सुविधा भी होगी। इससे बातचीत की आवाज भी रिकॉर्ड की जा सकेगी। रिकॉर्ड किए गए वीडियो और डेटा की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
इस व्यवस्था से किसी विवाद की स्थिति में घटना की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही शिकायतों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने में भी रिकॉर्डिंग उपयोगी साबित होगी।
टीसी को मिलेगी खास डिजाइन की जैकेट
पायलट प्रोजेक्ट में टिकट जांच कर्मचारियों को विशेष रूप से तैयार की गई जैकेट भी दी जाएगी। इसमें अलग-अलग पॉकेट और कंपार्टमेंट होंगे, ताकि टीसी अपने काम से जुड़े जरूरी उपकरण आसानी से रख सकें।
जैकेट में हैंड हेल्ड टर्मिनल (HHT), इलेक्ट्रॉनिक फेयर टिकट (EFT) मशीन, आईडी कार्ड, नेम बैज और अन्य टिकट जांच उपकरण रखने की सुविधा होगी।
जैकेट को जल्दी सूखने वाले माइक्रोफाइबर कपड़े से तैयार किया जा रहा है, ताकि लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को सुविधा मिल सके।
यात्रियों को आसानी से पहचान में आएंगे अधिकृत टीसी
नई जैकेट का एक उद्देश्य टिकट जांच कर्मचारियों की पहचान को भी स्पष्ट करना है। अलग डिजाइन और पहचान के कारण यात्रियों को ये समझने में आसानी होगी कि उनके सामने अधिकृत रेलवे कर्मचारी है। इससे टिकट जांच की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टीसी की सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
मुंबई लोकल में टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीसी के बीच विवाद की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में बहस बढ़कर हाथापाई तक पहुंच जाती है और ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल होते रहे हैं।
ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए बॉडी कैमरे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसी विवाद की स्थिति में रिकॉर्डिंग से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
‘नमस्ते अभियान’ के तहत पहल
पश्चिम रेलवे की ये पहल ‘नमस्ते अभियान’ के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल टिकट नियमों का पालन सख्ती से कराना नहीं, बल्कि टिकट जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है।
हाईटेक जैकेट में क्या-क्या होगा?
- बॉडी कैमरा लगाने की सुविधा
- HHT और EFT मशीन रखने के लिए अलग जगह
- आईडी कार्ड और नेम बैज के लिए स्थान
- कई पॉकेट और अलग-अलग कंपार्टमेंट
- टिकट जांच के अन्य उपकरण रखने की सुविधा
- जल्दी सूखने वाला माइक्रोफाइबर कपड़ा
- टीसी की स्पष्ट और अलग पहचान
कुल मिलाकर, पश्चिम रेलवे की इस पहल का मकसद टिकट जांच के दौरान होने वाले विवादों को रिकॉर्ड करना, टीसी की सुरक्षा बढ़ाना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर आगे इस व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू करने पर फैसला लिया जा सकता है।

























