मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई देने लगा है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख झीलों में शामिल तुलसी झील अब पूरी तरह भरकर ओवरफ्लो होने लगी है। इससे कुछ घंटे पहले विहार झील भी अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंचकर छलकने लगी थी। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए इसे मुंबई के लिए राहत भरी खबर बताया है।
हालांकि, शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सभी सात झीलों में कुल जल भंडारण अभी भी अधिकतम क्षमता का लगभग 41.43 प्रतिशत ही है। इसके बावजूद लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आने वाले दिनों में जलस्तर में और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
देर रात ओवरफ्लो हुई तुलसी झील
बीएमसी के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मंगलवार रात 11:43 बजे तुलसी झील ओवरफ्लो होने लगी। इससे पहले उसी रात करीब 9 बजे विहार झील भी पूरी तरह भरकर बहने लगी थी।
बीते कई दिनों से झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही तेज बारिश के चलते दोनों जलाशयों में तेजी से पानी जमा हुआ और आखिरकार वे अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच गए।
मुंबई की जलापूर्ति में अहम भूमिका निभाती है तुलसी झील
तुलसी झील मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सात प्रमुख झीलों में शामिल है। इसकी खास बात यह है कि ये उन दो झीलों में से एक है जो बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सीमा के भीतर स्थित हैं।
ये झील प्रतिदिन लगभग 1.8 करोड़ लीटर (18 मिलियन लीटर) पानी मुंबई के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाती है। भले ही इसकी क्षमता अन्य झीलों की तुलना में कम हो, लेकिन शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में इसका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिछले दो वर्षों में कब हुई थी ओवरफ्लो?
तुलसी झील इस साल अपेक्षाकृत जल्दी भर गई है। इससे पहले वर्ष 2025 में ये 16 अगस्त को ओवरफ्लो हुई थी, जबकि 2024 में 4 अगस्त को इसका जलस्तर अधिकतम सीमा तक पहुंचा था।
इस बार मानसून की तेज बारिश के कारण झील ने निर्धारित समय से पहले ही अपनी पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जिसे अच्छी बारिश का संकेत माना जा रहा है।
147 साल पुरानी है तुलसी झील
मुंबई नगर निगम मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित तुलसी झील एक कृत्रिम जलाशय है। इसका निर्माण वर्ष 1879 में पूरा हुआ था और उस समय इसके निर्माण पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए थे।
आज भी ये झील मुंबई की जलापूर्ति प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है और शहर की बढ़ती आबादी की पानी की जरूरतों को पूरा करने में योगदान देती है।
कितनी है तुलसी झील की जल संग्रहण क्षमता?
तुलसी झील का कैचमेंट एरिया लगभग 6.76 वर्ग किलोमीटर है, जबकि पूरी तरह भरने पर इसका जल क्षेत्रफल लगभग 1.35 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है।
इसमें अधिकतम 804.6 करोड़ लीटर (8046 मिलियन लीटर) उपयोग योग्य पानी संग्रहित किया जा सकता है। इसी कारण इसे मुंबई की सात प्रमुख जलापूर्ति झीलों में सबसे छोटी झील माना जाता है।
ओवरफ्लो होने के बाद अतिरिक्त पानी कहां जाता है?
BMC के अनुसार, जब तुलसी झील अपनी पूरी क्षमता तक भर जाती है, तो उसका अतिरिक्त पानी स्वाभाविक रूप से विहार झील की ओर प्रवाहित होता है। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है और शहर की जलापूर्ति प्रणाली को भी मजबूती मिलती है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है जलस्तर
मौसम विभाग की ओर से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बारिश जारी रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली अन्य झीलों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
BMC लगातार सभी जलाशयों की निगरानी कर रही है ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे और मानसून के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
मुंबईकरांना पाणीपुरवठा करणाऱ्या ७ तलावांपैकी तुळशी तलाव मंगळवार (दिनांक ७ जुलै २०२६) रात्री ११ वाजून ४३ मिनिटांनी ओसंडून वाहू लागला आहे.
—–Tulsi Lake, one of the 7 lakes that supplies water to Mumbai, has started overflowing at 11:43 pm yesterday (7 July 2026) pic.twitter.com/W1qr6jXR7M
— माझी Mumbai, आपली BMC (@mybmc) July 8, 2026
मुंबईकरों के लिए राहत की खबर
बारिश के इस दौर में तुलसी और विहार झील का ओवरफ्लो होना मुंबई के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में इसी तरह बारिश जारी रहती है तो शहर की जलापूर्ति करने वाली अन्य झीलों का जलस्तर भी संतोषजनक स्तर तक पहुंच सकता है। इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता बेहतर रहने की उम्मीद बढ़ गई है।
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