Kathe Galli Violence: नासिक की सड़कों पर मंगलवार की रात एक बार फिर तनाव का माहौल देखने को मिला। काठे गली (Kathe Galli) इलाके में अवैध दरगाह के ढहाने की कार्रवाई से पहले हिंसा भड़क उठी, जिसमें चार से पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। नासिक नगर निगम (Nashik Municipal Corporation) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस अवैध निर्माण को हटाने की तैयारी की थी, लेकिन अफवाहों और बिजली गुल होने की वजह से भीड़ ने पुलिस और नगर निगम की टीम पर पथराव शुरू कर दिया। यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। आइए, इस घटना की पूरी कहानी को समझें और जानें कि यह तनाव कैसे और क्यों भड़का।
काठे गली में सातपीर दरगाह नामक एक धार्मिक स्थल लंबे समय से विवादों में रहा है। नासिक नगर निगम ने इसे अवैध निर्माण (Illegal Construction) घोषित किया था और 1 अप्रैल 2025 को दरगाह ट्रस्ट को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर इसे स्वेच्छा से हटाने को कहा था। इस नोटिस में साफ लिखा था कि अगर समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर निगम पुलिस की मदद से इसे ढहा देगा। ट्रस्ट की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर नगर निगम ने मंगलवार, 15 अप्रैल को कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया। इसके लिए 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया और इलाके को बैरिकेड्स से घेर लिया गया। लेकिन रात के अंधेरे में बिजली गुल होने और अफवाहों के फैलने से स्थिति बिगड़ गई।
रात करीब 12 बजे, जब बिजली आपूर्ति अचानक बंद हुई, तो काठे गली में हलचल शुरू हो गई। स्थानीय लोगों के बीच यह अफवाह फैल गई कि दरगाह को तुरंत तोड़ा जा रहा है। देखते ही देखते 400 से ज्यादा लोगों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने पुलिस और नगर निगम की टीम पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे चार नगर निगम अधिकारी और 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पांच वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का लाठीचार्ज किया। इस हिंसा ने न केवल काठे गली, बल्कि पूरे नासिक में तनाव का माहौल बना दिया।
यह पहली बार नहीं है जब काठे गली में इस दरगाह को लेकर तनाव देखने को मिला है। फरवरी 2025 में भी सकल हिंदू समाज नामक संगठन ने इस अवैध निर्माण को हटाकर वहां बजरंग बली का मंदिर बनाने की मांग की थी। उस समय संगठन ने 22 फरवरी को बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी, जिसके चलते पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। इलाके में कर्फ्यू लगाया गया और कुछ साधु-संतों को गिरफ्तार भी किया गया। उस समय धार्मिक नेताओं ने हस्तक्षेप कर समय मांगा था, लेकिन ट्रस्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद नासिक नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर इस बार सख्ती दिखाई।
नासिक नगर निगम की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में अवैध धार्मिक स्थलों की सूची जारी करने का आदेश दिया था, जिसमें सातपीर दरगाह को ‘बी’ श्रेणी का अवैध निर्माण घोषित किया गया था। निगम ने इस दरगाह को 25 साल तक अनदेखा किया, जिसके चलते स्थानीय संगठनों में नाराजगी थी। इस बार निगम ने साफ कर दिया कि अगर ट्रस्ट ने निर्माण नहीं हटाया, तो वह इसे ढहाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करेगा। मंगलवार को शुरू हुई कार्रवाई बुधवार की सुबह तक चली, और दरगाह का अवैध हिस्सा ढहा दिया गया। इस दौरान इलाके में 100 मीटर के दायरे में आम लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया था।
इस घटना ने नासिक में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता को उजागर किया। अफवाहों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कुछ लोगों का कहना था कि बिजली कटौती जानबूझकर की गई थी, ताकि कार्रवाई को गुप्त रखा जाए। वहीं, पुलिस का कहना है कि बिजली गुल होना एक संयोग था, लेकिन इसका फायदा उठाकर भीड़ ने हिंसा शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, ताकि पथराव करने वालों की पहचान की जा सके। काठे गली से भाभा नगर जाने वाले रास्तों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है, और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
काठे गली का यह विवाद सिर्फ एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है। यह उन सामाजिक तनावों को भी दर्शाता है, जो अवैध निर्माण और धार्मिक भावनाओं के बीच टकराव से पैदा होते हैं। नासिक जैसे शहर, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक साथ रहते हैं, में ऐसी घटनाएं जल्दी ही संवेदनशील हो जाती हैं। इस बार पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर हालात को काबू में किया, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए एक सबक है कि अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकना कितना जरूरी है।































