Mumbai: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के मलाड इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कथित ढोंगी बाबा पर अंधविश्वास फैलाने, अघोरी पूजा करने और लोगों को गुमराह करने के आरोप लगे हैं। स्थानीय निवासियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मलाड क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति, जिसकी पहचान रिदम पांचाल के रूप में हुई है, हर गुरुवार और रविवार को “भूत उतारने” के नाम पर अघोरी अनुष्ठान करता है। ये गतिविधियां सार्वजनिक स्थानों, खासकर नगर निगम के गार्डन में आयोजित की जाती थीं, जिससे इलाके में डर और असहजता का माहौल बन गया।
4 अप्रैल को कथित तौर पर आरोपी ने सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में खुलेआम इस तरह की पूजा की। इस दौरान के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
अघोरी पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन अनुष्ठानों में कई डरावनी और असामान्य वस्तुओं का उपयोग किया जाता था, जिनमें शामिल हैं बकरी का कलेजा, काला और लाल कपड़ा, श्मशान की राख, नींबू और सुई, शराब की बोतल और कुमकुम व सिगरेट।
आरोप है कि पूजा के बाद इन वस्तुओं को चौराहों पर फेंक दिया जाता था, जिससे खासकर महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल पैदा हो गया।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने इस मामले के वीडियो सबूत करीब दो हफ्ते पहले ही पुलिस को सौंप दिए थे। साथ ही, अंधविश्वास और जादू-टोना विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद आरोपी अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है।
आरोपी का पक्ष
आरोपी रिदम पांचाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वो किसी प्रकार का जादू-टोना नहीं करता। उसके अनुसार, वो केवल “पूजा के माध्यम से लोगों की सेवा” करता है और इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं कमाता। उसका दावा है कि ये एक धार्मिक अनुष्ठान है, जिसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं को दूर करना है।
अंधविश्वास पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि मुंबई जैसे आधुनिक और शिक्षित शहर में भी अंधविश्वास किस तरह जड़ें जमाए हुए है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हैरानी की बात ये है कि कई शिक्षित लोग भी ऐसे ढोंग और अंधविश्वास का शिकार बन रहे हैं, जिससे समाज में गलत संदेश फैल रहा है।
मलाड की ये घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समाज में बढ़ते अंधविश्वास पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाई जा सकेगी।
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