Thane-Borivali Twin Tunnel: मुंबई और ठाणे के बीच सफर के समय को नाटकीय रूप से कम करने वाली 11.8 किमी लंबी ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल परियोजना एक बार फिर विवादों के भंवर में है। 18,838 करोड़ रुपये की इस महात्वाकांक्षी योजना में मलबे (मक) के निस्तारण को लेकर नीति में अचानक हुए बदलाव ने ठाणे के मुल्ला बाग और मानपाडा क्षेत्र के हजारों निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा तय किए गए ‘सुरक्षित मॉडल’ को दरकिनार कर रहा है।
क्या था ‘शिंदे मॉडल’ और क्यों उपजा विवाद?
परियोजना की शुरुआत में मलबे के परिवहन को लेकर स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। इसके बाद 10 जून 2025 को सह्याद्री गेस्ट हाउस में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में स्पष्ट निर्णय लिए गए थे:
- नो डंपर जोन: मुल्ला बाग की किसी भी आवासीय सड़क से मलबे का परिवहन नहीं किया जाएगा।
- कन्वेयर बेल्ट प्रणाली: टनल बोरिंग मशीन (TBM) से निकलने वाले मलबे को पूरी तरह से बंद कन्वेयर बेल्ट के जरिए सत्या शंकर सोसायटी के आगे स्थित यूनिअबेक्स परिसर तक ले जाया जाना था।
- सुरक्षित डंपिंग: डंपरों की आवाजाही को केवल इस परिसर तक ही सीमित रखा गया था ताकि घनी आबादी वाले इलाकों पर कोई असर न पड़े।
नीति में बदलाव: स्वास्थ्य और सुरक्षा पर मंडराता खतरा
हालिया जानकारी के अनुसार, MMRDA अब इस बंद कन्वेयर बेल्ट प्रणाली के बजाय आवासीय क्षेत्रों से सीधे डंपरों के जरिए मलबा ढोने की योजना बना रहा है। इस बदलाव से मुल्ला बाग और मानपाडा के निवासियों में भारी असंतोष है। उनकी चिंताएं जायज हैं:
- वायु प्रदूषण और धूल: प्रतिदिन 400 से 500 डंपरों की आवाजाही से हवा में उड़ने वाली सूक्ष्म धूल (PM 2.5) बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों के लिए घातक साबित हो सकती है।
- यातायात का दमघोंटू जाम: मानपाडा और मुल्ला बाग की संकरी सड़कों पर सैकड़ों भारी वाहनों का दबाव ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा।
- दुर्घटनाओं का डर: गिरते मलबे और भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही से रिहायशी इलाकों में सड़क हादसों का जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा।
जनता की चेतावनी: विकास की कीमत विनाश नहीं
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता करके नहीं चुकाई जा सकती। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उपमुख्यमंत्री के ‘लिखित आश्वासन’ और बैठक के कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) का पालन नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर काम रोकने को मजबूर होंगे।
ठाणे-बोरीवली टनल परियोजना कनेक्टिविटी के लिहाज से गेम-चेंजर है, लेकिन MMRDA की कार्यशैली ने इस पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन जनहित को सर्वोपरि रखकर अपनी तकनीक में सुधार करता है या फिर यह विवाद कानूनी लड़ाई में तब्दील होता है।































