नवी मुंबई: पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच गहराते सैन्य संघर्ष की तपिश अब सात समंदर पार नवी मुंबई के ठाणे-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र (TTC MIDC) तक पहुँच गई है। एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक गलियारों में शुमार इस बेल्ट के उद्यमी और लाखों श्रमिक अब एक अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहे हैं। युद्ध की वजह से कच्चे माल की कीमतों में आई भारी तेजी और वैश्विक सप्लाई चेन के टूटने ने यहाँ के कारखानों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
“बम वहां गिर रहे, मार हमारी इंडस्ट्री पर”
टीटीसी एमआईडीसी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (TMIA) के अध्यक्ष के. आर. गोपी ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, “युद्ध भले ही खाड़ी देशों में हो रहा हो, लेकिन उसकी परोक्ष मार यहाँ के उद्योगों पर पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो अस्थिरता पैदा हुई है, उसका सीधा बोझ हमारी उत्पादन लागत पर आ गया है।”
कच्चे माल का संकट और उत्पादन लागत
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है। इसका सबसे बुरा असर टीटीसी बेल्ट की प्लास्टिक और पेट्रो-केमिकल इकाइयों पर पड़ा है:
कीमतों में उछाल: प्लास्टिक ग्रेन्यूल, पेट्रो-केमिकल उत्पाद और पीपी बैग जैसे आवश्यक कच्चे माल की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई है।
सप्लाई चेन: आयात-निर्यात की प्रक्रिया धीमी होने से कच्चे माल का स्टॉक खत्म हो रहा है और तैयार माल पोर्ट पर अटका हुआ है।
आर्थिक दबाव: उत्पादन महंगा होने से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) का मुनाफा खत्म हो गया है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
गैस की किल्लत और ‘मेस’ पर ताला
औद्योगिक क्षेत्र में केवल मशीनों का पहिया ही नहीं थमा, बल्कि मजदूरों के निवाले पर भी संकट मंडरा रहा है। क्षेत्र में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत देखी जा रही है। समय पर गैस उपलब्ध न होने के कारण कई औद्योगिक होटल (मेस) और छोटे भोजनालय बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं। कई प्रतिष्ठानों में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है, जिससे कामगारों के पलायन का डर सताने लगा है।
लाखों की रोजी-रोटी पर मंडराता खतरा
टीएमआईए के अनुसार, यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो टीटीसी एमआईडीसी में काम करने वाले लाखों लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। उद्योगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने से छंटनी की आशंका बढ़ गई है। कारोबारी अब सरकार से राहत पैकेज या वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सुनिश्चित करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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