महाराष्ट्र के नाशिक में ‘कैप्टन’ का मुखौटा पहनकर घूम रहे एक रसूखदार शिकारी के काले कारनामों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। हाई-प्रोफाइल कैप्टन खरात मामला अब केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत और रसूख के दुरुपयोग की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां बन चुका है। दैनिक भास्कर की पड़ताल और पुलिसिया जांच में जो खुलासे हो रहे हैं, उन्होंने खाकी और खादी दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
1. दरिंदगी की कोई सीमा नहीं: गर्भवती महिलाएं भी बनीं शिकार
जांच में सामने आया है कि खरात की हिम्मत इस कदर बढ़ चुकी थी कि उसने मर्यादा की तमाम दीवारें लांघ दीं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में केवल आम महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई नेताओं और बड़े अफसरों की पत्नियां भी शामिल हैं। सबसे वीभत्स खुलासा यह है कि इस दरिंदे ने गर्भवती महिलाओं तक को अपनी हवस का शिकार बनाने से गुरेज नहीं किया। अब तक आधिकारिक तौर पर 6 मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन पीड़ितों की बढ़ती संख्या बता रही है कि यह आंकड़ा कहीं बड़ा हो सकता है।
2. साल 2002: जब पुलिस ने खुद ‘भस्मासुर’ को पालना शुरू किया
दैनिक भास्कर की पड़ताल के अनुसार, खरात के पाप का घड़ा 24 साल पहले ही भर चुका था।
* पंचवटी हॉस्टल कांड: साल 2002 में खरात ने एक हॉस्टल की छात्राओं के साथ छेड़खानी की थी। पुलिस उसे पकड़कर पंचवटी थाने भी ले आई थी।
* सिस्टम का ‘सुरक्षा कवच’: जैसे ही खरात थाने पहुंचा, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे। रसूख के दबाव में आकर पुलिस ने उसे बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया। जानकारों का कहना है कि अगर उस दिन पुलिस ने अपना धर्म निभाया होता, तो आज दर्जनों महिलाओं की अस्मत और जिंदगी बच सकती थी।
3. ‘हाई-प्रोफाइल’ ढाल ने दबाए दर्जनों मामले
खरात के संपर्क सत्ता के गलियारों और पुलिस महकमे के शीर्ष तक थे। पिछले कुछ वर्षों में कम से कम दो बार गंभीर शिकायतें सामने आईं, लेकिन हर बार ‘ऊपर’ से आए आदेशों ने फाइलों को धूल फांकने पर मजबूर कर दिया। इसी राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण ने उसे यह यकीन दिला दिया कि वह कानून से ऊपर है।
4. हर दिन एक नया खुलासा, पुलिस भी हैरान
वर्तमान जांच कर रहे अधिकारी भी खरात के नए-नए कारनामों को सुनकर दंग हैं। वह जिस शातिर तरीके से महिलाओं को जाल में फंसाता और फिर रसूख का डर दिखाकर उनका मुंह बंद रखता था, वह किसी प्रोफेशनल अपराधी से कम नहीं है। अब पुलिस उन तमाम कड़ियों को जोड़ रही है जिन्होंने पिछले दो दशकों में खरात को बचाने में भूमिका निभाई।
कैप्टन खरात मामला केवल एक व्यक्ति की विकृति नहीं है, बल्कि यह उस सड़े हुए तंत्र का चेहरा है जो अपराधियों को ‘रसूख’ के नाम पर अभयदान देता है। अब समय आ गया है कि उन सफेदपोश चेहरों को भी बेनकाब किया जाए जिन्होंने इस दरिंदे को संरक्षण दिया।
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