ठाणे: हर साल मानसून के दौरान ठाणे शहर के कई इलाकों में होने वाले जल-जमाव (Water-logging) की समस्या से निपटने के लिए ठाणे महानगर पालिका ने इस बार कमर कस ली है। पारंपरिक सफाई के तरीकों को पीछे छोड़ते हुए, मनपा प्रशासन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे द्वारा विकसित अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहर के नालों में कचरे के कारण पैदा होने वाली बाधाओं को दूर करना और जल निकासी को सुचारु बनाना है।
300 किमी का नेटवर्क और कचरे की चुनौती
ठाणे शहर में लगभग 300 किलोमीटर लंबा नालों का जाल बिछा हुआ है। ये नाले शहर के विभिन्न हिस्सों का पानी लेकर खाड़ी (Creek) में विसर्जित करते हैं।
* बढ़ती समस्या: पिछले कुछ वर्षों में नालों में प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और अन्य कचरे को फेंकने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
* मैनुअल सफाई की सीमा: अब तक सफाई का काम मुख्य रूप से मजदूरों द्वारा किया जाता था, लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर यह तरीका नाकाफी साबित होता था। कचरा जमा होने से पानी का प्रवाह रुक जाता था और सड़कें तालाब बन जाती थीं।
कैसा होगा IIT बॉम्बे का ‘सफाई रोबोट’?
मनपा प्रशासन इस तकनीक को प्रायोगिक आधार (Pilot Project) पर शहर के 10 प्रमुख स्थानों पर तैनात करेगा।
* प्लास्टिक का पृथक्करण: यह रोबोटिक प्रणाली विशेष रूप से नालों में तैरते हुए प्लास्टिक और ठोस कचरे को पहचानने और उन्हें जल प्रवाह से अलग करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
* निर्बाध जल प्रवाह: कचरे को एक तरफ रोककर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पानी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता रहे।
* सटीकता और गति: रोबोट उन संकरे स्थानों पर भी सफाई करने में सक्षम होगा जहाँ इंसानी पहुंच मुश्किल या जोखिम भरी होती है।
मनपा को ‘स्मार्ट’ तकनीक से क्या हैं उम्मीदें?
ठाणे मनपा प्रशासन का मानना है कि इस नई पहल से शहर की सूरत बदल सकती है:
* गुणवत्ता में सुधार: रोबोटिक सफाई से कचरा पूरी तरह साफ होगा, जिससे मानसून में आपात स्थिति पैदा नहीं होगी।
* समय और श्रम की बचत: जो काम मजदूर घंटों में करते थे, वह तकनीक के जरिए मिनटों में और अधिक सफाई के साथ पूरा होगा।
* पर्यावरण संरक्षण: खाड़ी में जाने वाले प्लास्टिक कचरे को शहर के भीतर ही रोक लेने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ होगा।
तकनीक से सुरक्षित होगा मानसून
ठाणे शहर के नागरिकों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। यदि 10 स्थानों पर यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे 300 किमी के नेटवर्क पर लागू किया जा सकता है। आईआईटी बॉम्बे की यह स्वदेशी तकनीक न केवल ठाणे, बल्कि देश के अन्य नगर निगमों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित हो सकती है।
मनपा प्रशासन का संदेश: “हम शहर को जल-जमाव मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। तकनीक का समावेश सफाई अभियान को नई दिशा देगा, लेकिन नागरिकों से भी अपील है कि वे नालों में कचरा न फेंकें।”
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