Mumbai: मानखुर्द वेस्ट क्षेत्र में स्थित अन्ना भाऊ साठे नगर डब्बा कंपाउंड में आज प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के तहत सैकड़ों झोपड़ियों को बुल्डोजर से हटाया गया, जिससे कई गरीब परिवार अचानक बेघर हो गए।

मिली जानकारी के अनुसार, ये जमीन कलेक्टर लैंड बताई जा रही है, जिस पर लंबे समय से झोपड़ियां बसी हुई थीं। प्रशासन ने इन झोपड़ियों को “अपात्र” घोषित करते हुए आज सुबह लगभग 6 बजे कार्रवाई शुरू की। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे, जिससे उन्हें सामान समेटने का भी मौका नहीं मिल सका।
अचानक कार्रवाई से मचा हड़कंप
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ये कार्रवाई अचानक हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई परिवारों का कहना है कि उनके पास अब न तो रहने के लिए छत बची है और न ही रोजमर्रा की जरूरत का सामान। कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके पास पीने के पानी तक के लिए बर्तन नहीं बचे।
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भीषण गर्मी में बढ़ी मुश्किलें
ये कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब मुंबई में गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। बेघर हुए परिवारों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें अब खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। उनके सामने खाने, पानी, कपड़े और बिस्तर जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है।
मदद की अपील
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और निवासियों ने लोगों से अपील की है कि वे आगे आकर प्रभावित परिवारों की मदद करें। फिलहाल इन लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं, कपड़े, बर्तन और अस्थायी आश्रय की सख्त जरूरत है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि गरीबों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।
मानखुर्द वेस्ट की ये घटना एक बार फिर शहरी गरीबों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विकास और कानून व्यवस्था के नाम पर की जा रही ऐसी कार्रवाइयों के बीच ये जरूरी हो जाता है कि प्रभावित लोगों के लिए उचित पुनर्वास और राहत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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