देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच जहां लोग राहत के लिए आइसक्रीम, चॉकलेट और ठंडे पेयों का सहारा लेते हैं, वहीं इस बार इन चीजों का आनंद लेना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब भारत के बाजारों में साफ दिखने लगा है।
गर्मी बढ़ी, लेकिन ठंडक हुई महंगी
दक्षिण भारत के बाद अब उत्तर भारत भी भीषण गर्मी की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में ठंडी चीजों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण इनकी उपलब्धता कम हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं।
सप्लाई चेन पर युद्ध का सीधा असर
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बढ़ोतरी से प्लास्टिक और पैकेजिंग महंगी हो गई है। चॉकलेट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कोको (Cocoa) और ड्राई फ्रूट्स का आयात प्रभावित हुआ है और समुद्री मार्ग से आने वाले सामान की ढुलाई और बीमा लागत बढ़ गई है। इन सभी कारणों से कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
ड्राई फ्रूट्स के दाम में भारी उछाल
दिल्ली के थोक बाजारों के व्यापारियों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में सूखे मेवों की कीमतों में 20% से 22% तक की वृद्धि हुई है। कुछ उत्पाद अफगानिस्तान और ईरान से आते हैं, जबकि कुछ यूरोप और अमेरिका से आयात होते हैं। युद्ध के चलते इनकी सप्लाई प्रभावित हुई है।
आइसक्रीम और चॉकलेट कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें
Naturals Ice Cream जैसी कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में लगभग 10% तक बढ़ोतरी की है। वहीं Mother Dairy ने भी कुछ आइसक्रीम के दाम बढ़ाए हैं। कंपनियों का कहना है कि ड्राई फ्रूट्स और कोको जैसी चीजों की लागत बढ़ गई है। आयात में देरी हो रही है और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
हेजलनट और कोको की कीमतों में तेज उछाल
Pascati Chocolates के अनुसार, हेजलनट की कीमतों में सालाना आधार पर 75% तक की वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण तुर्की से आने वाली सप्लाई में बाधा और महंगे एयर शिपमेंट हैं।
इंस्टेंट पेय पदार्थ भी प्रभावित
Rasna जैसे इंस्टेंट ड्रिंक बनाने वाले ब्रांड भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। पैकेजिंग मैटेरियल की कमी और महंगे प्लास्टिक के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे बाजार में उपलब्धता कम हो गई है।
कंपनियों के पास सीमित विकल्प
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि रेसिपी में बदलाव करना आसान नहीं है। क्वालिटी से समझौता नहीं किया जा सकता और इसलिए कीमत बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
गर्मी के इस मौसम में जहां ठंडी चीजों की मांग चरम पर है, वहीं वैश्विक परिस्थितियों ने इनकी कीमतों को बढ़ा दिया है। ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। आने वाले समय में यदि हालात नहीं सुधरे, तो इन उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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