भारत में हवाई यात्रा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब दूर-दराज और समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। SkyHop Aviation को DGCA से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) मिल गया है, जिससे ये देश का पहला डेडिकेटेड कमर्शियल सीप्लेन ऑपरेटर बन गया है।
लक्षद्वीप से होगी शुरुआत
कंपनी अपने पहले चरण में लक्षद्वीप के पांच द्वीपों को आपस में और मुख्य भूमि से जोड़ने की योजना बना रही है। इसके लिए 19 सीटों वाले सीप्लेन का संचालन किया जाएगा, जिससे यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और अनोखा सफर अनुभव मिल सकेगा।
DGCA से मिली बड़ी मंजूरी
SkyHop Aviation को मिला एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी की संस्थापक और सीईओ अवनी सिंह ने इसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि कंपनी को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आधार देती है। उन्होंने DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार भी जताया।
क्या है सीप्लेन सेवा की खासियत?
सीप्लेन ऐसी विमान सेवा है जो पानी और जमीन दोनों पर टेकऑफ और लैंडिंग कर सकती है। इससे उन इलाकों में कनेक्टिविटी आसान हो जाती है, जहां पारंपरिक एयरपोर्ट नहीं होते। खासकर द्वीपीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह सेवा बेहद उपयोगी मानी जाती है।
यात्रियों को मिलेगा नया अनुभव
कंपनी का उद्देश्य सिर्फ यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों को एक यादगार अनुभव देना भी है। SkyHop का कहना है कि ये सेवा सुरक्षित, भरोसेमंद और व्यावहारिक होने के साथ-साथ भारत के दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आगे की योजनाएं
लक्षद्वीप के बाद कंपनी देश के अन्य हिस्सों में भी सीप्लेन सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। जहां पारंपरिक परिवहन सीमित है, वहां यह सेवा बड़ा बदलाव ला सकती है।
सफल टेस्ट फ्लाइट
SkyHop ने 6 अप्रैल 2026 को ऋषिकेश में गंगा बैराज से सफल टेस्ट फ्लाइट पूरी की थी। इस दौरान मॉडिफाइड De Havilland Canada DHC-6 Twin Otter विमान का इस्तेमाल किया गया, जिसने पानी से टेकऑफ और लैंडिंग दोनों सफलतापूर्वक किए।
SkyHop Aviation की यह पहल भारत में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खासकर लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्रों के लिए यह सेवा यात्रा को आसान, तेज और आकर्षक बनाएगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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