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‘Strait of Hormuz’ नहीं अब कहिए ‘Strait of Trump’, अमेरिकी राष्ट्रपति के सुझाव ने छेड़ी नई बहस

Strait of Hormuz
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दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह बना है अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने इस जलडमरूमध्य का नाम बदलकर “Strait of Trump” रखने का सुझाव दिया है।

ये पोस्ट Truth Social पर साझा किया गया, जिसमें एक नक्शा भी दिखाया गया है और उसमें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को नए नाम के साथ दर्शाया गया है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?

Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और ये वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है।

दुनिया के कुल कच्चे तेल के शिपमेंट का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए यहां की किसी भी गतिविधि का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

नाम बदलने के सुझाव के पीछे क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि Donald Trump का यह कदम सिर्फ नाम बदलने का प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। हाल के समय में अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच इस तरह की ‘रीब्रांडिंग’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ती सख्ती

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने Iran के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें इस जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही गई थी। ये संकेत देता है कि जब तक दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता खासकर परमाणु समझौता नहीं होता, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है।

तेल बाजार पर दिखा असर

इस जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है। आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 7% तक बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) भी बढ़त के साथ करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ये स्पष्ट कर दिया है कि Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर होने वाले राजनीतिक और रणनीतिक फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

नाम बदलने के प्रस्ताव से ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा।

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