दोस्तों, अगर आप कभी मुंबई के मरीन ड्राइव गए हैं, तो आपने अरब सागर के किनारे पड़े उन बड़े-बड़े चार पैरों वाले कंक्रीट के ढांचों को जरूर देखा होगा। पहली नजर में ये किसी विशाल पत्थर या अधूरे निर्माण का हिस्सा लगते हैं। ज्यादातर लोग इनके पास बैठकर फोटो खिंचवाते हैं, समुद्र की लहरों का आनंद लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ये ढांचे आखिर हैं क्या और इनका काम क्या है।
असल में इनका नाम टेट्रापॉड (Tetrapod) है और ये मुंबई की सुरक्षा के सबसे बड़े “साइलेंट हीरोज” माने जाते हैं। अगर ये टेट्रापॉड न हों, तो मरीन ड्राइव, उसकी सड़कें और आसपास का इलाका समुद्र की ताकत के सामने काफी हद तक असुरक्षित हो सकता है।
आखिर क्या होते हैं टेट्रापॉड?
टेट्रापॉड खास तरह के कंक्रीट से बने भारी-भरकम ढांचे होते हैं, जिनके चार पैर होते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये समुद्र की तेज लहरों का सामना कर सकें और उनकी ताकत को कम कर दें।
मरीन ड्राइव पर लगे हर टेट्रापॉड का वजन करीब 2 टन है। यहां ऐसे लगभग 6,500 टेट्रापॉड लगाए गए हैं, जो दिन-रात समुद्र की लहरों से मुंबई की रक्षा करते हैं।
ये कैसे बचाते हैं मरीन ड्राइव को?
जब अरब सागर में हाई टाइड आता है या मानसून के दौरान समुद्र उफान पर होता है, तब विशाल लहरें पूरी ताकत के साथ किनारे से टकराती हैं। अगर ये लहरें सीधे तटबंध और सड़क से टकराएं, तो धीरे-धीरे वहां कटाव शुरू हो सकता है और संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
यहीं टेट्रापॉड अपना काम करते हैं।
जैसे ही लहरें इनसे टकराती हैं, उनकी ताकत कई दिशाओं में बंट जाती है। इससे लहरों की ऊर्जा कम हो जाती है और पानी का दबाव सीधे तट पर नहीं पड़ता।
चार पैरों वाला डिजाइन क्यों?
टेट्रापॉड का सबसे बड़ा रहस्य इसका चार पैरों वाला डिजाइन है। ये आकार इन्हें एक-दूसरे से मजबूती से जुड़ने में मदद करता है। जब हजारों टेट्रापॉड एक साथ लगाए जाते हैं, तो वे एक मजबूत लेकिन छिद्रयुक्त दीवार बना देते हैं।
इससे पानी का बहाव धीमा हो जाता है और समुद्र की लहरें अपना पूरा असर नहीं दिखा पातीं।
अगर टेट्रापॉड न हों तो क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मरीन ड्राइव पर ये संरचनाएं न लगाई जाएं, तो समुद्र की लगातार टकराने वाली लहरें धीरे-धीरे तटबंध और सड़क की नींव को कमजोर कर सकती हैं।
मानसून के दौरान तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि उस समय अरब सागर की लहरें कई फीट ऊंची उठती हैं और उनका दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
मुंबई में कब लगाए गए थे टेट्रापॉड?
टेट्रापॉड की तकनीक सबसे पहले 1950 में फ्रांस में विकसित की गई थी। बाद में दुनिया के कई समुद्री शहरों ने इसे अपनाया।
मुंबई में मरीन ड्राइव और समुद्री तटों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन्हें 1998 से 2004 के बीच स्थापित किया गया था। तब से लेकर आज तक ये लगातार समुद्री कटाव और ऊंची लहरों से शहर की रक्षा कर रहे हैं।
फोटो पॉइंट नहीं, मुंबई के रक्षक हैं ये
आज लाखों पर्यटक मरीन ड्राइव पर आते हैं। लोग यहां बैठकर सूर्यास्त देखते हैं, समुद्र की ठंडी हवा का आनंद लेते हैं और टेट्रापॉड के सामने तस्वीरें खिंचवाते हैं।
लेकिन अगली बार जब आप मरीन ड्राइव जाएं, तो इन टेट्रापॉड्स को सिर्फ पत्थर समझने की गलती मत कीजिएगा। ये वो मजबूत प्रहरी हैं जो हर दिन और हर रात अरब सागर की ताकत के सामने खड़े होकर मुंबई की रक्षा करते हैं।
मरीन ड्राइव की खूबसूरती जितनी मशहूर है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी सुरक्षा भी है। इस सुरक्षा की जिम्मेदारी बड़ी हद तक इन टेट्रापॉड्स के कंधों पर है। ये विशाल कंक्रीट संरचनाएं न केवल समुद्री कटाव को रोकती हैं, बल्कि मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित समुद्री किनारे को सुरक्षित भी रखती हैं। इसलिए इन्हें मरीन ड्राइव के “अनदेखे रक्षक” कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।
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