गढ़चिरौली (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में कथित नक्सली चेतावनी पर्चे मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से नक्सलवाद खत्म करने की तय समयसीमा के बीच जिले में इस तरह का पर्चा सामने आने से सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बरामद पर्चे वास्तव में किसी नक्सली संगठन द्वारा जारी किए गए हैं या फिर किसी अन्य समूह ने माहौल बनाने के लिए इन्हें इस्तेमाल किया है।
सड़क किनारे लाल कपड़े और सफेद पर्चे मिले
गढ़चिरौली जिले की एटापल्ली तहसील के पिपली-बुर्गी पुलिस थाना क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे संदिग्ध सामग्री मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने लाल रंग के कपड़े पर लिखा चेतावनी संदेश और सफेद कागज पर लाल स्याही से लिखा एक पर्चा बरामद किया।
पुलिस ने सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पर्चों में क्षेत्र में चल रहे खनन कार्यों और कुछ कंपनियों की गतिविधियों का विरोध किया गया है।
चार कंपनियों को काम बंद करने की चेतावनी
जानकारी के अनुसार, गढ़चिरौली के कुंदम गांव के पास चल रहे माइनिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर पर्चे में विरोध जताया गया है। कथित नक्सली साहित्य में JSW, ओम साईं, नेचुरल और सनफ्लावर समेत चार कंपनियों को तुरंत काम बंद करने की चेतावनी दी गई है।
इसके अलावा, हेतालकासा-कुदरी-मोहरली क्षेत्र में किए जा रहे ड्रोन सर्वे का भी विरोध किया गया है। पर्चे में ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों को खनन कंपनियों का समर्थन नहीं करने की चेतावनी देने की बात सामने आई है।
पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, तेज हुआ तलाशी अभियान
पर्चा मिलने के बाद गढ़चिरौली पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही तलाशी अभियान भी तेज कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा कदम उठाए जा रहे हैं।
पर्चे में भाजपा नेता अशोक कामड़े के नाम का उल्लेख
सूत्रों के मुताबिक, बरामद पर्चे में भाजपा नेता अशोक कामड़े के नाम का भी उल्लेख किया गया है। पर्चे में विशेष रूप से ओम साईं मेमोरियल कंपनी की गतिविधियों का विरोध किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस कंपनी को खनन कार्य के लिए करीब 640 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है और कंपनी जिले में अपने प्रोजेक्ट्स का विस्तार कर रही है।
पर्चे की प्रमाणिकता की जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां
हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात ये भी सामने आई है कि पर्चे में लॉयड्स मेटल कंपनी का नाम शामिल नहीं है। जबकि इससे पहले कथित नक्सली संगठनों की ओर से लॉयड्स मेटल परियोजना का कई बार विरोध किया जा चुका है।
इसी वजह से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि बरामद पर्चे वास्तव में नक्सली संगठन से जुड़े हैं या इसके पीछे किसी अन्य समूह की भूमिका है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।



























