RPF Personnel Extortion Case: मुंबई सेंट्रल टर्मिनस पर तीन रेलवे पुलिस फोर्स (आरपीएफ) कर्मियों पर एक यात्री से उगाही करने का आरोप लगा है। इन कर्मियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है, क्योंकि सत्र न्यायालय ने पिछले हफ्ते उनकी जमानत खारिज कर दी थी।
घटना 10 अगस्त की है, जब राजस्थान के एक जौहरी और उनकी आठ साल की बेटी मुंबई सेंट्रल से दुरंतो एक्सप्रेस में चढ़ने वाले थे। एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर उनका बैग चेक करने के लिए रोका। बैग की तलाशी में 14 ग्राम सोना और 31,000 रुपये से ज्यादा नकदी मिली। जौहरी ने इन चीजों के बारे में संतोषजनक जवाब दिया, लेकिन फिर भी उन्हें कथित तौर पर एक कमरे में ले जाया गया। वहां उनसे गाली-गलौज की गई, धमकाया गया और एक खाली कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।
आरोप है कि आरपीएफ कर्मियों ने जौहरी से 30,000 रुपये की उगाही की और सिर्फ 1,900 रुपये “यात्रा खर्च” के लिए लौटाए। सोना वापस कर दिया गया और उन्हें “भाग जाने” के लिए कहा गया। इसके बाद जौहरी अपनी बेटी के साथ राजस्थान लौट गए और बाद में शिकायत दर्ज की।
सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने नियम तोड़े, क्योंकि बैग की तलाशी सीसीटीवी के सामने और रजिस्टर में दर्ज करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई। कोर्ट ने माना कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ जरूरी है, क्योंकि तलाशी एक कमरे में की गई, जो नियमों के खिलाफ है और कर्मियों के “गलत इरादे” को दर्शाता है।
आरोपी कर्मी—राहुल भोसले (47), ललित जगताप (50) और अनिल राठौड़ (37)—18 अगस्त से फरार बताए जा रहे हैं, जब उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और शिकायत में देरी होने से अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह होता है। उनका कहना है कि वे सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। उनकी याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई होने की संभावना है।































