महाराष्ट्र

महाराष्ट्र: मुंबई में 1 वोट, बाकी 28 नगर निगमों में 4 वोट क्यों? जानें पूरा सिस्टम

महाराष्ट्र
Image Source- Web

महाराष्ट्र में नगर महापालिका चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 15 जनवरी 2026 को राज्य के 29 नगर निगमों में मतदान कराया जा रहा है। इस चुनाव में करोड़ों मतदाता अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को चुनने के लिए वोट डाल रहे हैं। हालांकि इस बार मतदान को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि मुंबई में मतदाता जहां सिर्फ एक वोट डाल रहे हैं, वहीं बाकी 28 नगर निगमों में लोगों को तीन या चार बार वोट क्यों देना पड़ रहा है।

दरअसल इसके पीछे चुनाव प्रणाली में किया गया एक बड़ा बदलाव है, जिसे मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम कहा जाता है। इस नई व्यवस्था ने मतदान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है और इसी वजह से अलग-अलग नगर निगमों में वोटिंग पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है।

मुंबई की बात करें तो बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी में परंपरागत व्यवस्था को ही लागू रखा गया है। यहां हर वार्ड से केवल एक पार्षद चुना जाता है। इसी कारण मुंबई के मतदाता को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सिर्फ एक बार बटन दबाना होता है और उसका मतदान वहीं पूरा हो जाता है।

लेकिन मुंबई को छोड़कर महाराष्ट्र के बाकी 28 नगर निगमों में मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम लागू किया गया है। इस प्रणाली के तहत एक ही वार्ड से एक से अधिक पार्षद चुने जाते हैं। यानी एक वार्ड में तीन या चार सीटें निर्धारित की गई हैं और हर सीट के लिए अलग-अलग उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मतदाता को हर सीट के लिए अलग-अलग वोट देना जरूरी होता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी वार्ड में चार सीटें हैं, तो मतदाता को चार अलग उम्मीदवारों के पक्ष में चार बार वोट डालना होगा। ईवीएम इस तरह से डिजाइन की गई है कि एक वोट डालने के बाद अगली सीट के लिए स्क्रीन अपने आप आगे बढ़ जाती है। जब तक सभी सीटों के लिए वोट नहीं डाले जाते, तब तक मतदान प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।

इस नई प्रणाली को लागू करने के पीछे सरकार का तर्क ये है कि बड़े नगर निगमों में जनसंख्या काफी अधिक होती है और सिर्फ एक प्रतिनिधि पूरे वार्ड की समस्याओं और जरूरतों का सही ढंग से प्रतिनिधित्व नहीं कर पाता। मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम के जरिए एक ही वार्ड से कई पार्षद चुने जाएंगे, जिससे अलग-अलग इलाकों और समुदायों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

सरकार का ये भी मानना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय शासन अधिक संतुलित और प्रभावी बनेगा। कम वार्डों में अधिक प्रतिनिधि चुने जा सकेंगे और नगर निगम के कामकाज में ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। हालांकि इस बदलाव के कारण मतदाताओं को शुरुआत में थोड़ी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन लोगों को जो पहली बार इस तरह की वोटिंग प्रक्रिया देख रहे हैं।

स्पष्ट तौर पर कहा जाए तो मुंबई में एक वोट डालने की वजह वहां का सिंगल-मेंबर वार्ड सिस्टम है, जबकि बाकी नगर निगमों में तीन या चार वोट डालने का कारण मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम है। ये बदलाव सिर्फ नगर निकाय चुनावों तक सीमित है और विधानसभा या लोकसभा चुनावों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इस नई चुनाव प्रणाली का मकसद स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि नगर निगमों में लिए जाने वाले फैसले अधिक व्यापक और जनहित में हों।

ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र महासंग्राम: मुंबई-पुणे समेत 29 नगर निगमों के लिए आज मतदान, 3.48 करोड़ मतदाता तय करेंगे उम्मीदवारों का भाग्य

You may also like