देश-विदेश

ड्रैगन की दहाड़ और ताइवान की ढाल: एशिया में युद्ध के बादल, ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर संशय और ‘टी-डोम’ की तैयारी

Trump
Image Source - Web

दुनिया का ध्यान वर्तमान में मध्य-पूर्व के युद्ध पर केंद्रित है, लेकिन इसी बीच दक्षिण एशिया और सुदूर पूर्व में तनाव का एक नया लावा फूटता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हवाई हमलों ने बारूद की गंध फैला दी है, वहीं दूसरी तरफ चीन ने ताइवान की ओर अपना सबसे आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 31 मार्च को होने वाली प्रस्तावित बीजिंग यात्रा अब टलने की कगार पर है।

ताइवान स्ट्रेट में 48 घंटे का ‘शक्ति प्रदर्शन’

पिछले 48 घंटों में ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में चीन की सैन्य गतिविधियों ने पूरी दुनिया को चौकन्ना कर दिया है। ताइवान की नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक:

* 26 से अधिक चीनी लड़ाकू विमानों ने ताइवान के हवाई क्षेत्र (ADIZ) में घुसपैठ और गश्त की है।

* भारी संख्या में चीनी युद्धपोत ताइवान की समुद्री सीमाओं के बेहद करीब देखे गए हैं।

* 25 फरवरी के बाद से यह ड्रैगन की सबसे बड़ी सैन्य उकसावे वाली कार्रवाई मानी जा रही है।

ताइवान का जवाब: $40 अरब का रक्षा बजट और ‘टी-डोम’

चीन की धमकियों के आगे झुकने के बजाय ताइवानी राष्ट्रपति विलियम लाई ने देश की सुरक्षा के लिए खजाना खोल दिया है। ताइवान ने 40 अरब डॉलर के विशेष रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है।

ताइवान की रक्षा रणनीति के दो मुख्य स्तंभ हैं:

 * टी-डोम (T-Dome): इजरायल के मशहूर ‘आयरन डोम’ की तर्ज पर ताइवान अपनी राजधानी ताइपे के चारों ओर एक अभेद्य हवाई सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है। यह सिस्टम चीनी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को हवा में ही ध्वस्त करने की क्षमता रखेगा।

 * नागरिक सुरक्षा: पूरे देश की बहुमंजिला इमारतों के नीचे अत्याधुनिक ‘एयर डिफेंस शेल्टर’ बनाए जा रहे हैं।

“हर नागरिक एक सैनिक”: ताइवान का संकल्प

ताइवान की सिविल डिफेंस एजुकेशन एसोसिएशन की डॉ. वेन लियू ने देश के संकल्प को स्पष्ट करते हुए कहा कि ताइवान की 2.3 करोड़ की आबादी अब केवल आम नागरिक नहीं है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि देश का हर नागरिक किसी भी हमले का सामना करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से सैनिक की भूमिका निभाने के लिए तैयार रहे।”

भारत के पड़ोस में भी अशांति

केवल पूर्वी एशिया ही नहीं, बल्कि भारत के पश्चिम में भी सीमाएं सुलग रही हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी हवाई हमलों और सीमा पर हो रही भारी गोलीबारी ने दक्षिण एशिया में एक नया मोर्चा खोल दिया है। इन घटनाओं ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को भी हाई अलर्ट पर रहने को मजबूर कर दिया है।

प्रमुख घटनाक्रम एक नजर में:

चीन की घेराबंदी: 48 घंटे में 26 सैन्य विमानों की गश्त।

ताइवान की तैयारी: 40 अरब डॉलर का रक्षा बजट और सिविल डिफेंस शेल्टर।

डिप्लोमेसी पर असर: तनाव के कारण ट्रंप की चीन यात्रा पर संकट के बादल।

पड़ोसी संकट: अफगान-पाक सीमा पर युद्ध जैसे हालात।

दुनिया इस समय एक बहु-आयामी सुरक्षा संकट (Multi-front crisis) की ओर बढ़ रही है। यदि ताइवान स्ट्रेट और अफगान-पाक सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक बड़े वैश्विक टकराव का रूप ले सकता है।

ये भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: गहराता ऊर्जा संकट और वैश्विक कूटनीति की विफलता

You may also like