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डिग्रियां लाखों, नौकरियां मुट्ठी भर: देश के 1.1 करोड़ स्नातक बेरोजगार, 25 साल से कम उम्र वालों के लिए स्थिति और भी विकट

बेरोजगार
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नई दिल्ली: भारत के शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार का परिदृश्य एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ रिपोर्ट ने स्नातक युवाओं के बीच बेरोजगारी के गहरे संकट को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 6.3 करोड़ स्नातक (20-29 वर्ष आयु वर्ग) में से 1.1 करोड़ युवा आज भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि देश की ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभांश) के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती है।

स्नातक होने के बाद ‘नौकरी का सूखा’

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं मिल पा रही है।

* स्थायी नौकरी का अभाव: बेरोजगार के रूप में पंजीकरण कराने के एक वर्ष के भीतर केवल 7 प्रतिशत स्नातकों को ही निश्चित या स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है।

* लंबा इंतजार: शेष 93 प्रतिशत युवा या तो स्वरोजगार, अनियमित दिहाड़ी मजदूरी या फिर लंबे समय तक बेरोजगारी झेलने को मजबूर हैं।

आयु वर्ग के अनुसार बेरोजगारी की दर (Analysis)

रिपोर्ट बताती है कि उम्र बढ़ने के साथ बेरोजगारी दर में थोड़ी कमी तो आती है, लेकिन शुरुआती करियर के वर्षों में यह बेहद उच्च स्तर पर बनी हुई है:

आयु वर्ग बेरोजगारी दर (%) स्थिति 

15 से 25 वर्ष करीब 40% सबसे नाजुक स्थिति, करियर की शुरुआत में ही बाधा

25 से 29 वर्ष करीब 20% अनुभव की कमी और स्किल गैप के कारण चुनौती |

समस्या की जड़ में क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के पीछे कुछ प्रमुख कारण उभर कर सामने आए हैं:

* स्नातकों की बढ़ती संख्या: पिछले कुछ दशकों में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी है, जिससे हर साल श्रम बाजार में आने वाले स्नातकों की संख्या में भारी उछाल आया है।

* स्किल और जॉब मिसमैच: डिग्री और उद्योग की जरूरतों के बीच एक बड़ी खाई है।

* स्थायी पदों की कमी: कंपनियां स्थायी नियुक्तियों के बजाय अनुबंध (Contract) या गिग इकॉनमी (Gig Economy) पर अधिक जोर दे रही हैं।

स्नातक होने के एक वर्ष के भीतर केवल एक छोटा हिस्सा ही स्थायी वेतन वाली नौकरी हासिल कर पाता है। हाल के वर्षों में स्नातकों की बढ़ती संख्या के कारण यह समस्या और विकराल हो गई है।” — रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’

भविष्य की चुनौती

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केवल डिग्री बांटने से रोजगार की समस्या हल नहीं होगी। यदि 20-29 वर्ष के ऊर्जावान युवाओं का एक बड़ा हिस्सा (1.1 करोड़) बेरोजगार बैठा है, तो यह आर्थिक विकास की गति को धीमा कर सकता है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर रोजगार सृजन के साथ-साथ ‘स्किल डेवलपमेंट’ पर युद्ध स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।

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