मुंबई में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अभेद्य बनाने के लिए मुंबई पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। परिमंडल-7 (Zone 7) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न थाना क्षेत्रों से एक साथ 50 आदतन अपराधियों को शहर की सीमा से बाहर (तड़ीपार) कर दिया गया है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक की यह सबसे बड़ी सामूहिक तड़ीपारी की कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे अंडरवर्ल्ड और स्थानीय गुंडा तत्वों में खलबली मच गई है।
डीसीपी हेमराजसिंह राजपूत के नेतृत्व में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
यह पूरी कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (DCP) हेमराजसिंह राजपूत के कुशल नेतृत्व और सटीक योजना के तहत की गई है। पुलिस ने पिछले काफी समय से इन अपराधियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी थी। ये वे अपराधी हैं जो बार-बार जेल जाने के बावजूद अपनी आदतों में सुधार नहीं ला रहे थे और जमानत पर बाहर आते ही फिर से वारदातों को अंजाम देने लगते थे।
कौन हैं ये अपराधी और क्यों हुई कार्रवाई?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तड़ीपार किए गए इन 50 अपराधियों का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इनमें से अधिकांश पर निम्नलिखित संगीन आरोप हैं:
* मारपीट और जबरन वसूली: स्थानीय व्यापारियों और फेरीवालों को धमकाना।
* नशीले पदार्थों की तस्करी: युवाओं को नशे के जाल में धकेलना।
* गंभीर चोट पहुँचाना: सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन और आतंक फैलाना।
* महिलाओं की सुरक्षा: छेड़छाड़ और स्थानीय इलाकों में असुरक्षा का माहौल पैदा करना।
सुरक्षा के लिए ‘तड़ीपारी’ का सुरक्षा कवच
पुलिस विभाग का मानना है कि इन अपराधियों की मौजूदगी से स्थानीय लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था। पुलिस उपायुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए इन सभी को मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे और पालघर जैसे आसपास के जिलों की सीमाओं से एक निश्चित अवधि के लिए बाहर कर दिया है। यदि ये अपराधी तड़ीपारी की अवधि के दौरान शहर की सीमा में नजर आते हैं, तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजा जाएगा।
जनता में विश्वास बहाली की कोशिश
इस बड़ी कार्रवाई के बाद परिमंडल-7 के अंतर्गत आने वाले इलाकों (मुलुंड, भांडुप, विक्रोली, घाटकोपर आदि) के नागरिकों ने राहत की सांस ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है। शहर में शांति भंग करने वाले और नागरिकों के मन में डर पैदा करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुंबई पुलिस की इस ‘मेगा तड़ीपारी’ ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि साल 2026 में अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। डीसीपी हेमराजसिंह राजपूत के इस कदम की न केवल पुलिस महकमे में बल्कि आम जनता के बीच भी काफी सराहना हो रही है।






























