मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य तेल की बिक्री को लेकर इन दिनों सख्ती बढ़ गई है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) ने साफ किया है कि खुले या बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर लागू नियम कोई नया प्रावधान नहीं है। उनके मुताबिक, खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक का प्रावधान देशभर में 2011 से लागू है। महाराष्ट्र में हालिया कार्रवाई का उद्देश्य इसी नियम को प्रभावी और एकसमान तरीके से लागू करना है।
खुले तेल पर क्यों बढ़ाई गई सख्ती?
FDA के मुताबिक खुले तेल की बिक्री में मिलावट, गलत लेबलिंग, घटिया गुणवत्ता और तेल की वास्तविक स्रोत संबंधी जानकारी छिपाने का जोखिम अधिक रहता है। हालिया जांच के दौरान कुछ कारोबारों में बिना वैध लाइसेंस के काम करने, सस्ते और बिना घोषित तेल की मिलावट, मानकों से कम गुणवत्ता वाले तेल तथा पुराने या एक्सपायरी के करीब तेल को दोबारा पैक करने जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
इसी वजह से महाराष्ट्र FDA ने खाद्य तेल के पूरे सप्लाई नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई है। इसमें निर्माता, रिफाइनर, डिस्ट्रीब्यूटर, थोक विक्रेता, खुदरा दुकानदार, ट्रांसपोर्टर और ऑनलाइन विक्रेता तक शामिल हैं।
अब कैसे बेचा जा सकेगा खाद्य तेल?
FDA के जारी निर्देशों के अनुसार खाद्य तेल को सीलबंद, छेड़छाड़-रोधी और पूरी जानकारी वाले लेबलयुक्त पैकेट में ही बेचा जाना चाहिए। खुले या बिना पैकिंग वाले तेल की बिक्री पर रोक का मकसद उपभोक्ताओं को तेल की गुणवत्ता, ब्रांड, मात्रा और स्रोत के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है।
खुदरा दुकानदारों को भी बिना सील या छेड़छाड़ वाले पैकेट स्वीकार नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित सप्लायर की जानकारी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को देने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
मिलावट मिलने पर कड़ी कार्रवाई
FDA ने खाद्य तेल में मिलावट को गंभीरता से लिया है। विभाग की जांच में सस्ते तेल को दूसरे तेलों में मिलाने, गलत जानकारी के साथ दोबारा पैकिंग करने और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ मामलों में कार्रवाई के तहत तेल भी जब्त किया गया है।
नियमों के उल्लंघन पर मामले की प्रकृति के अनुसार आर्थिक जुर्माने के साथ लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जाने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से जुड़े उल्लंघनों पर ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
किन तेलों पर लागू होगा नियम?
यह व्यवस्था सिर्फ किसी एक प्रकार के तेल तक सीमित नहीं है। इसमें मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, सफोला/कुसुम, कपासबीज, राइस ब्रान, पाम, नारियल, तिल और मक्का जैसे खाद्य तेलों के साथ वनस्पति तेल भी शामिल हैं।
FDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ खतरनाक या प्रतिबंधित पदार्थों की मौजूदगी वाले तेल को असुरक्षित माना जाएगा। पुराने और जंग लगे कंटेनरों के दोबारा इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है, ताकि धातु संबंधी दूषण का खतरा कम किया जा सके।
कारोबारियों की चिंता और सरकार का रुख
खुले तेल की बिक्री पर सख्ती से छोटे व्यापारियों और पारंपरिक तेल कारोबारियों के बीच चिंता भी बढ़ी है। कारोबारियों की ओर से नियमों में राहत की मांग की गई है। इस मुद्दे पर सरकार के स्तर पर भी चर्चा हुई है, जहां खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के साथ पारंपरिक कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाने की बात सामने आई।
हालांकि, 26 अगस्त को इस मामले में प्रशासन की ओर से स्थिति में बदलाव भी देखने को मिला। खुले तेल पर सख्ती को लेकर जारी शुरुआती बयान और अनुपालन आदेश को करीब एक घंटे बाद वापस ले लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक आगे की प्रक्रिया और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को लेकर सरकार के स्तर पर चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी?
खाद्य तेल खरीदते समय ग्राहकों को खुले तेल के बजाय सीलबंद और सही लेबल वाले पैक को प्राथमिकता देनी चाहिए। पैकेट पर ब्रांड का नाम, मात्रा, संबंधित जानकारी और पैकिंग से जुड़ी जानकारी जरूर जांचें। पैकेट की सील टूटी हुई हो या लेबल से छेड़छाड़ दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।
FDA की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यही है कि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य तेल पहुंचे और मिलावट के मामलों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।
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