कोलकाता: आम लोगों के रोजाना नाश्ते का अहम हिस्सा मानी जाने वाली Bread अब पश्चिम बंगाल में महंगी हो गई है। राज्य में बेकरी कारोबार से जुड़ी कंपनियों ने बढ़ती उत्पादन और पैकेजिंग लागत के बीच ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कुछ किस्मों के दाम में ₹4 से ₹5 प्रति पैकेट तक का इजाफा हुआ है।
इस कीमत बढ़ोतरी का सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जो रोजाना नाश्ते में Bread का इस्तेमाल करते हैं। ब्रेड की कीमत बढ़ने के पीछे दूध, ईंधन, पैकेजिंग और अन्य इनपुट लागत में बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
400 ग्राम ब्रेड अब ₹40 की
कोलकाता और आसपास के इलाकों में 400 ग्राम व्हाइट स्लाइस्ड ब्रेड की कीमत करीब ₹4 बढ़ाकर ₹36 से ₹40 की जा रही है। वहीं, प्रीमियम श्रेणी की होल व्हीट और मल्टीग्रेन ब्रेड की कीमतों में करीब ₹5 की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, अलग-अलग ब्रांड और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर हो सकता है। इसलिए ग्राहकों को पैकेट पर दर्ज नए MRP की जांच करने की सलाह दी जाती है।
ब्रेड के दाम क्यों बढ़े?
बेकरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय में ब्रेड बनाने और उसे बाजार तक पहुंचाने की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसका असर अब उत्पाद की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
1. पैकेजिंग लागत में भारी बढ़ोतरी
Bread की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से जुड़े कच्चे माल की कीमत बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पैकेजिंग लागत में करीब 37 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। आयातित कच्चे माल की कीमत और रुपये की कमजोरी भी लागत बढ़ने की वजहों में शामिल है।
2. दूध और अन्य सामग्री महंगी
ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई इनपुट की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। बेकरी उद्योग के अनुसार मार्जरीन, वनस्पति तेल, ग्लूटेन, सोया आटा, रिफाइंड ऑयल और प्रिजर्वेटिव जैसे उत्पादों की लागत बढ़ी है। कुछ सामग्री की कीमतों में दो अंकों में वृद्धि दर्ज की गई है।
3. परिवहन और उत्पादन खर्च बढ़ा
बेकरी से दुकानों तक ब्रेड पहुंचाने के लिए परिवहन और डिलीवरी लागत भी बढ़ी है। इसके अलावा उत्पादन से जुड़े ईंधन और अन्य खर्च बढ़ने से बेकरी संचालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
कोलकाता में रोजाना लाखों ब्रेड की बिक्री
Bread की कीमतों में बढ़ोतरी का असर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोलकाता और आसपास के इलाकों में इसका बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता और उसके आसपास करीब 26 ब्रेड निर्माता हैं और कुल दैनिक बिक्री लगभग 3 लाख लोफ तक बताई गई है।
व्हाइट स्लाइस्ड ब्रेड बाजार का बड़ा हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत में बढ़ोतरी का असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
दूध के बाद अब ब्रेड ने बढ़ाया नाश्ते का खर्च
ब्रेड की कीमतों में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब खाद्य और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े खर्च पहले से ही परिवारों के बजट को प्रभावित कर रहे हैं। दूध की कीमतों में हालिया वृद्धि के बाद ब्रेड की बढ़ी कीमत से सुबह के नाश्ते का खर्च भी बढ़ सकता है।
खासकर कामकाजी परिवारों, छात्रों और ऐसे लोगों के लिए जो रोजाना ब्रेड, सैंडविच या टोस्ट का इस्तेमाल करते हैं, छोटी कीमत बढ़ोतरी भी महीने के कुल खर्च में अंतर डाल सकती है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं ब्रेड के दाम?
बेकरी उद्योग में लागत का दबाव बना रहने पर दूसरे निर्माता भी कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। पहले भी देश के अन्य हिस्सों में प्रमुख ब्रेड ब्रांडों की कीमतों में ₹5 तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि, हर ब्रांड की कीमत अलग हो सकती है और कीमतों में बदलाव स्थानीय उत्पादन, वितरण लागत और पैकेजिंग खर्च पर निर्भर करेगा।
फिलहाल पश्चिम बंगाल के उपभोक्ताओं के लिए ब्रेड खरीदते समय नए MRP की जांच करना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग ब्रांड और पैक साइज के हिसाब से नई कीमतें अलग हो सकती हैं।
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