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महाराष्ट्र: कैब यात्रियों पर महंगाई की मार: हैचबैक से SUV तक बढ़े रेट्स

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महाराष्ट्र की सड़कों पर कैब की सवारी अब पहले से ज्यादा जेब पर भारी पड़ने वाली है! ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-बेस्ड कैब सर्विस से जुड़े ड्राइवरों ने खुद ही सरकारी निर्धारित किराए को लागू कर दिया है। ये फैसला मंगलवार (23 सितंबर) से प्रभावी हो गया है, और यात्रियों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे पारदर्शिता की जीत मान रहे हैं, वहीं कईयों को महंगाई का एक और झटका लग रहा है। आइए, इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि क्या-क्या बदला है।

ड्राइवरों ने क्यों उठाया ये कदम?
महाराष्ट्र में कैब ड्राइवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय गिग कामगार मंच के अध्यक्ष डॉ. केशव नाना क्षीरसागर ने बताया कि ऐप कंपनियां लंबे समय से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (MMRTA) के निर्देशों की अनदेखी कर रही थीं। ड्राइवरों को लगा कि अब इंतजार काफी हो चुका, इसलिए उन्होंने खुद ही सरकारी रेट्स लागू करने का ऐलान कर दिया।

क्षीरसागर कहते हैं, “हमारे ड्राइवर अब छोटी हैचबैक कारों (जैसे वैगनआर) के लिए 28 रुपये प्रति किलोमीटर, सेडान (जैसे स्विफ्ट डिजायर) के लिए 31 रुपये और एसयूवी (जैसे एर्टिगा) के लिए 34 रुपये वसूल रहे हैं।” ये पुराने रेट्स से काफी ज्यादा है, जहां छोटी कैब्स का बेस फेयर महज 15-16 रुपये प्रति किलोमीटर था। एमएमआरटीए ने 16 सितंबर को ही इन कंपनियों को पत्र भेजकर ब्लैक एंड येलो टैक्सी के रेट्स फॉलो करने को कहा था। नॉन-एसी के लिए 20.66 रुपये और एसी के लिए 22.72 रुपये प्रति किलोमीटर। लेकिन अब ड्राइवरों के इस कदम से सवारी और महंगी हो गई है।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई पहल
इस बदलाव को और ज्यादा विश्वसनीय बनाने के लिए गिग कामगार मंच ने एक खास वेबसाइट शुरू की है – www.onlymeter.in। यहां यात्री सरकारी किराया तालिका चेक कर सकते हैं और सही रेट्स की जानकारी ले सकते हैं। ये कदम न सिर्फ ड्राइवरों को सपोर्ट करता है, बल्कि यात्रियों को भी धोखे से बचाता है। क्षीरसागर का मानना है कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और ऐप कंपनियों पर दबाव बनेगा कि वे नियमों का पालन करें।

यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर आप मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य शहरों में कैब बुक करते हैं, तो तैयार रहिए, क्योंकि आपकी जेब अब ज्यादा ढीली होगी। पहले जहां एक छोटी राइड 200-300 रुपये में हो जाती थी, अब वो 400 रुपये तक पहुंच सकती है। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है, लेकिन ड्राइवरों का तर्क है कि ये उनके हक की लड़ाई है। वे कहते हैं कि कम रेट्स की वजह से उनका खर्च नहीं निकल पाता, और ऐप कंपनियां ज्यादा कमीशन काट लेती हैं।

गिग कामगारों की बड़ी मांगें
ये सिर्फ किराए का मामला नहीं है; गिग कामगार मंच ने कई और मुद्दों पर आवाज उठाई है। उनकी प्रमुख मांगें शामिल हैं:

  • ऐप-बेस्ड कैब और ऑटो का किराया ब्लैक एंड येलो टैक्सी के बराबर किया जाए।
  • बाइक टैक्सी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
  • ब्लैक एंड येलो टैक्सी तथा ऑटो रिक्शा के परमिट पर कैप लगाई जाए।
  • कैब ड्राइवरों के लिए एक अलग वेलफेयर बोर्ड बनाया जाए।
  • अन्य राज्यों की तर्ज पर ‘महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट’ लागू किया जाए।

क्षीरसागर ने राज्य परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि विभाग ने उन ऐप कंपनियों को अस्थायी लाइसेंस दिए, जिनके खिलाफ अवैध बाइक टैक्सी चलाने की एफआईआर दर्ज थी। “ये लाइसेंस ई-बाइक्स के लिए थे, लेकिन पेट्रोल वाली व्हाइट प्लेट बाइक्स पर दुरुपयोग हो रहा है। सरकार ने इन्हें ब्लैकलिस्ट करने की बजाय एक महीने का एक्सटेंशन दे दिया,” उन्होंने जोड़ा।

आगे क्या? 
ये बदलाव महाराष्ट्र की ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में एक बड़ा शिफ्ट ला सकता है। अगर ऐप कंपनियां अब भी चुप रहीं, तो ड्राइवरों का आंदोलन और तेज हो सकता है।

यात्रियों के लिए सलाह
अगली बार कैब बुक करने से पहले www.onlymeter.in चेक करें और सही रेट्स पता करें। क्या ये फैसला ड्राइवरों की जीत है या यात्रियों के लिए बोझ? आपकी राय क्या है? कमेंट्स में बताएं!

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