महाराष्ट्र

Nagpur Factory Blast:”लाशों के ढेर पर खड़ी सरकार”, वडेट्टीवार का तीखा प्रहार भूमिका: सुरक्षा के दावों की उड़ती धज्जियां

Nagpur Factory Blast
Nagpur Factory Blast

Nagpur Factory Blast: महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर एक बार फिर धमाकों की गूंज और चीख-पुकार से दहल उठी है। SBL कंपनी में हुए भीषण विस्फोट ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि प्रशासन की उस ‘नींद’ को भी उजागर कर दिया है जो पिछले कई हादसों के बाद भी नहीं खुली। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

आंकड़े जो रूह कंपा दें
वडेट्टीवार ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि नागपुर जिले में इस वक्त कुल 11 विस्फोटक कारखाने संचालित हैं। पिछले 18 महीनों का रिकॉर्ड डराने वाला है:

  • कुल मौतें: पिछले डेढ़ साल में विभिन्न धमाकों में 43 श्रमिकों की जान जा चुकी है।
  • महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित: इन मृतकों में 25 महिलाएं शामिल थीं।
  • ताजा हादसा: रविवार को हुए स्फोट में 20 मजदूरों की मौत हुई, जिनमें 19 महिलाएं थीं।
    क्या गरीबों की जान इतनी सस्ती है? मात्र 300 रुपये की दिहाड़ी के लिए ये मजदूर अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं, और सरकार सिर्फ मुआवजे का झुनझुना थमा देती है।

प्रशासनिक विफलता और ‘पेसो’ की भूमिका पर सवाल
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार को बार-बार ‘सेफ्टी ऑडिट’ की चेतावनी दी गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

  • दूरी का बहाना नहीं: विस्फोटक पदार्थों पर नियंत्रण रखने वाला ‘पेसो’ (PESO) कार्यालय घटनास्थल से मात्र 10 किमी की दूरी पर है, फिर भी नियमित जांच क्यों नहीं होती?
  • बुनियादी ढांचे का अभाव: जिस कंपनी में धमाका हुआ, वहां तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क तक नहीं है। रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी के लिए यह एक बड़ा कारण बना।
  • विभागों की चुप्पी: फैक्ट्री इंस्पेक्टर और श्रम विभाग आखिर किसकी शह पर इन गंभीर उल्लंघनों को नजरअंदाज कर रहे हैं?

मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए
सदन में सरकार को घेरते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि 15 लाख या 50 लाख रुपये की घोषणा करने से किसी की मां, पत्नी या बेटी वापस नहीं आएगी। उनके पीछे अनाथ हुए बच्चों का भविष्य अंधकार में है। पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता से ज्यादा कार्यस्थल पर ‘सुरक्षा की गारंटी’ और दोषियों पर ‘कठोर दंडात्मक कार्रवाई’ चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश
विजय वडेट्टीवार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसे चिंताजनक माना। उन्होंने निर्देश दिया है कि इस विषय पर केवल सतही चर्चा न हो, बल्कि आने वाले शुक्रवार तक ‘ध्यानाकर्षण प्रस्ताव’ (Calling Attention Motion) के माध्यम से इस पर विस्तृत चर्चा की जाए।

नागपुर का यह हादसा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक ‘मानव निर्मित त्रासदी’ है। अगर अब भी सरकार और प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो ये कारखाने ‘रोजगार के अवसर’ नहीं बल्कि ‘मौत के कुएं’ बने रहेंगे।

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