मुंबई

मुंबई में 85 लोगों ने चुनी इच्छामृत्यु की राह, ‘लिविंग विल’ को लेकर बढ़ी जागरूकता

हरीश राणा
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मुंबई में जीवन के अंतिम चरण को लेकर एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा तेजी से चर्चा में आ रहा है। महानगर में अब तक 85 लोगों ने ऐसी स्थिति के लिए पहले से ही अपनी इच्छा दर्ज कराई है, जब वे असाध्य बीमारी या गंभीर हादसे के कारण सामान्य जीवन जीने में असमर्थ हो जाएं। इन लोगों ने ‘लिविंग विल’ के माध्यम से पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु का विकल्प चुना है।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा की जा रही है, जहां हाल के समय में ‘लिविंग विल’ को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। ‘लिविंग विल’ एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें व्यक्ति पहले से ये तय कर सकता है कि गंभीर और असाध्य स्थिति में उसे जीवन रक्षक उपकरणों पर जिंदा रखा जाए या नहीं।

दरअसल, कई ऐसे मरीज होते हैं जो लंबे समय तक असहनीय दर्द, कोमा या गंभीर बीमारी की स्थिति में रहते हैं, जहां उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम होती है। ऐसे हालात में पैसिव यूथेनेशिया के तहत मरीज को कृत्रिम लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाने की अनुमति दी जा सकती है, जिससे वो प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त हो सके।

भारत में Passive Euthanasia को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ शर्तों के साथ मान्यता दी गई है, जिसके बाद ‘लिविंग विल’ को कानूनी आधार मिला। हालांकि, ये प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और सख्त नियमों के तहत ही लागू की जाती है, ताकि किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो सके।

मुंबई में 85 लोगों द्वारा ‘लिविंग विल’ भरना इस बात का संकेत है कि अब लोग जीवन की गुणवत्ता और गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। ये सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्तिगत निर्णय और भावनात्मक पहलू से जुड़ा विषय है, जिसमें व्यक्ति अपने अंतिम समय को लेकर पहले से निर्णय लेना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में परिवार, डॉक्टर और कानूनी प्रणाली के बीच संतुलन बेहद जरूरी होता है, ताकि मरीज की इच्छा का सम्मान करते हुए सभी नियमों का पालन किया जा सके।

मुंबई में बढ़ती ये संख्या एक नई सोच और जागरूकता को दर्शाती है, जहां लोग सिर्फ जीवन जीने ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक तरीके से जीवन समाप्त करने के अधिकार पर भी खुलकर विचार कर रहे हैं।

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