मुंबई के कुर्ला में दिसंबर 2024 में हुए दर्दनाक बस हादसे को लेकर एक बड़ा कानूनी अपडेट सामने आया है। Bombay High Court ने इस मामले के मुख्य आरोपी बस ड्राइवर संजय मोरे को जमानत दे दी है। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिससे पूरे शहर में आक्रोश फैल गया था।
क्या था पूरा मामला?
ये हादसा 9 दिसंबर 2024 की रात कुर्ला इलाके में हुआ था, जब एक इलेक्ट्रिक BEST बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर चल रहे लोगों और वाहनों से टकरा गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, बस ने करीब 20 से अधिक वाहनों को टक्कर मारी और कई पैदल यात्रियों को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में 9 लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?
Bombay High Court ने जमानत देते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने माना कि आरोपी ड्राइवर पिछले लगभग 15 महीनों से जेल में था और मामले की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।
इसके अलावा अदालत ने ये भी कहा कि ये मामला “जानबूझकर हत्या” की बजाय लापरवाही से जुड़ा प्रतीत होता है।
एक अहम बिंदु ये भी रहा कि ड्राइवर को इलेक्ट्रिक बस चलाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां कम से कम 7 दिन का प्रशिक्षण जरूरी था, वहीं उसे केवल 3 दिन का सीमित प्रशिक्षण दिया गया, वो भी बिना किसी प्रैक्टिकल अभ्यास के।
अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने इस मामले में सिस्टम की बड़ी लापरवाही की ओर भी इशारा किया। न्यायालय ने कहा कि बिना उचित प्रशिक्षण के किसी ड्राइवर को भीड़भाड़ वाले शहर में बस चलाने देना बेहद गंभीर चूक है।
ये भी कहा गया कि इस हादसे के पीछे केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण व्यवस्था की खामियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
आरोपी पर क्या हैं आरोप?
ड्राइवर संजय मोरे पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder), गंभीर चोट पहुंचाना और संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शामिल है।
हालांकि, अदालत ने फिलहाल इन आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है और मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।
कुर्ला बस हादसा न केवल एक दर्दनाक दुर्घटना थी, बल्कि इसने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत से ये साफ संकेत मिलता है कि मामले में केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियां भी जांच के दायरे में हैं।
आने वाले समय में इस केस की सुनवाई और फैसले पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी, क्योंकि ये मामला सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी से सीधे जुड़ा हुआ है।
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