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महाराष्ट्र: बस में छूटे थे ₹24 हजार, 2 साल बाद उसी बस में मिलीं कासाबाई, कंडक्टर ने लौटाई पूरी रकम

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महाराष्ट्र के वाशिम से ईमानदारी की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। दो साल पहले सरकारी बस में छूटे ₹24 हजार रुपये आखिरकार उनकी असली मालिक को वापस मिल गए। खास बात ये रही कि जिस कंडक्टर ने रकम सुरक्षित रखी थी, उसी की नजर दो साल बाद बस में सवार हुई महिला पर पड़ी और आधार कार्ड से उनकी पहचान हो गई।

अप्रैल 2024 में बस में छूट गई थी रकम

मामला अप्रैल 2024 का है। कासाबाई गायकवाड अपने बीमार पति के साथ संभाजीनगर बस स्टेशन से मालेगांव जाने वाली सरकारी बस में सवार हुई थीं। सफर पूरा होने के बाद दोनों बस से उतर गए, लेकिन उनकी एक छोटी थैली सीट पर ही छूट गई। बस वाशिम डिपो पहुंचने के बाद कंडक्टर राजू वाणी ने बस की जांच की तो उन्हें ये थैली मिली।

थैली में ₹24 हजार नकद और एक मेडिकल पर्ची थी, जिस पर कासाबाई गायकवाड का नाम लिखा था। कंडक्टर ने उन्हें खोजने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के साथ पूछताछ केंद्र पर सूचना दी गई और पर्ची पर उपलब्ध संपर्क के जरिए भी बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन महिला से संपर्क नहीं हो सका।

दो साल तक सुरक्षित रखे पैसे

कासाबाई के नहीं मिलने के बाद भी कंडक्टर ने रकम को अपने पास सुरक्षित रखा। देखते ही देखते करीब दो साल बीत गए। इस दौरान कासाबाई भी अपने खोए हुए पैसे वापस मिलने की उम्मीद छोड़ चुकी थीं। लेकिन हाल ही में एक ऐसा संयोग बना, जिसने पूरी कहानी बदल दी।

आधार कार्ड से हुई पहचान

दो दिन पहले राजू वाणी की ड्यूटी अकोला से वाशिम जाने वाली बस में थी। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला बस में सवार हुईं और मालेगांव जाने के लिए टिकट मांगा। उम्र 75 वर्ष से अधिक होने के कारण मुफ्त यात्रा के लिए उन्होंने अपना आधार कार्ड दिखाया।

आधार कार्ड पर नाम देखते ही कंडक्टर राजू वाणी को दो साल पुरानी घटना याद आ गई। नाम था – कासाबाई गायकवाड

उन्होंने तुरंत महिला से पूछा कि क्या कभी उनके ₹24 हजार रुपये बस में छूट गए थे। महिला ने इसकी पुष्टि की। इसके बाद राजू वाणी उन्हें वाशिम डिपो लेकर गए और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी जानकारी दी। रिकॉर्ड और पहचान की पुष्टि के बाद दो साल से सुरक्षित रखी गई रकम कासाबाई को लौटा दी गई।

पैसे मिलते ही भावुक हो गईं कासाबाई

दो साल बाद अपनी खोई हुई रकम वापस पाकर बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं। उन्होंने कंडक्टर राजू वाणी को धन्यवाद दिया और उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर ₹1,100 का इनाम भी दिया।

ये घटना बताती है कि जिम्मेदारी और ईमानदारी से किया गया एक छोटा सा प्रयास भी किसी के जीवन में बड़ी खुशी ला सकता है। वाशिम के कंडक्टर राजू वाणी की इस पहल की अब खूब सराहना हो रही है।

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