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महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून के बाद पहला मामला, पुणे में ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ FIR

पुणे

पुणे: महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर नया कानून लागू होने के बाद पुणे में एक ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला पुणे के खड़क पुलिस स्टेशन से जुड़ा है, जहां एक चर्च में धार्मिक प्रवचन के दौरान कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रिटेन से आया एक धार्मिक नेता पुणे के गुरुवार पेठ इलाके के एक चर्च में प्रवचन दे रहा था। इसी दौरान कुछ हिंदुत्व संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रवचन के माध्यम से लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद पुलिस में शिकायत दी गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने 9 अगस्त को संबंधित ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज किया। रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत 7 अगस्त को हुई घटना को लेकर की गई थी।

FIR में किस कानून की धारा लगी?

इस मामले में महत्वपूर्ण बात ये है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार FIR Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 23(b) के तहत दर्ज की गई है। इस धारा में इमिग्रेशन एवं विदेशी नागरिकों से जुड़े कानून या उसके तहत बनाए गए नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है।

इसलिए मामले को सीधे तौर पर नए महाराष्ट्र धर्मांतरण कानून के तहत दर्ज FIR बताने से पहले पुलिस की FIR और आगे की जांच की स्थिति देखना जरूरी है। आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी व्यक्ति पर लगे आरोप अदालत में साबित होना बाकी है।

क्या है महाराष्ट्र का नया धर्म स्वतंत्रता कानून?

महाराष्ट्र विधानसभा ने मार्च 2026 में Maharashtra Freedom of Religion Act, 2026 पारित किया था। कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, दबाव या अन्य गैरकानूनी तरीकों से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। कानून में स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को भी नियामकीय व्यवस्था के दायरे में रखा गया है।

इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी देनी होगी। कानून में धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की पूर्व सूचना का प्रावधान है। धर्म परिवर्तन के बाद भी घोषणा और सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

जबरन या गैरकानूनी धर्मांतरण पर सजा

कानून में गैरकानूनी धर्मांतरण के मामलों में सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में दोष सिद्ध होने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

वहीं यदि मामला महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से जुड़े व्यक्ति के धर्मांतरण से संबंधित हो, तो सजा अधिक कठोर हो सकती है। ऐसे मामलों में 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

धर्मांतरण से जुड़ी शादी पर भी प्रावधान

नए कानून में ऐसे विवाहों को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं, जिनमें धर्म परिवर्तन गैरकानूनी तरीके से कराया गया हो। यदि किसी विवाह का आधार ही अवैध धर्मांतरण पाया जाता है, तो कानून के तहत उस विवाह की वैधता पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा कानून में पीड़ितों के लिए गुजारा भत्ता, कानूनी सहायता और पुनर्वास जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

कानून को लेकर पहले से रही है बहस

महाराष्ट्र के इस कानून को लेकर विधानसभा में भी लंबी बहस हुई थी। सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल जबरदस्ती, धोखाधड़ी और लालच के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना है, जबकि कानून की आलोचना करने वाले समूहों ने धार्मिक स्वतंत्रता और इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं।

पुणे का ये मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ये नए धर्मांतरण कानून के लागू होने के बाद सामने आया है। हालांकि, ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ दर्ज FIR में फिलहाल Immigration and Foreigners Act की धारा 23(b) का उल्लेख है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट होगी।

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