महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहगढ़ किले में केतन अग्रवाल की मौत के मामले की जांच में एक चश्मदीद गवाह के बयान से नया मोड़ सामने आया है। पुलिस को दिए बयान में गवाह ने दावा किया है कि उसने अपनी आंखों के सामने केतन अग्रवाल को चट्टान की ओर धक्का दिए जाते देखा था। गवाह के मुताबिक, घटना के बाद जब उसने इस बारे में चेतन चौधरी से सवाल किया तो उसे भी चुप रहने और किले से नीचे फेंकने की धमकी दी गई।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये गवाह घटना के पांच दिन बाद 23 जून को पुलिस के पास पहुंचा था। उसने बताया कि शुरुआत में डर की वजह से उसने किसी को कुछ नहीं बताया। बाद में मीडिया में घटना से जुड़ी खबरें देखने के बाद उसने पुलिस से संपर्क कर अपना बयान दर्ज कराया।
किले पर केतन और सिया के पीछे चल रहा था चेतन
गवाह के अनुसार, वो अपने दोस्त के परिवार के साथ लोहगढ़ किला घूमने गया था। किले की सीढ़ियां चढ़ते समय उसने केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल को साथ देखा। उनके पीछे चेतन चौधरी चल रहा था।
गवाह ने पुलिस को बताया कि गर्मी के बावजूद चेतन ने हुडी पहन रखी थी। उसने इसको लेकर चेतन से सवाल भी किया था। यही हुडी बाद में चेतन को पहचानने में गवाह के लिए महत्वपूर्ण बात बनी।
किले के ऊपर पहुंचने के बाद चेतन कुछ समय मंदिर के पास बैठ गया, जबकि केतन और सिया आगे बढ़ गए। बाद में चेतन भी उनके पीछे चला गया।
पेट में दर्द के कारण कुछ देर के लिए दूर हुआ था गवाह
गवाह के बयान के मुताबिक, इसी दौरान उसके पेट में ऐंठन होने लगी और वो कुछ समय के लिए घटनास्थल से अलग हो गया। जब वो वापस लौटा तो उसने कथित तौर पर सिया को चेतन की तरफ इशारा करते देखा।
गवाह का दावा है कि इसके बाद सिया नीचे बैठी और केतन के पैर पर लात मारी। इसी दौरान चेतन पीछे से आया और उसने केतन को चट्टान की ओर धक्का दे दिया।
हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल गवाह के पुलिस को दिए बयान और जांच से सामने आई जानकारी पर आधारित दावे हैं। मामले में इन दावों की पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
सवाल पूछने पर गवाह को भी धमकी देने का दावा
गवाह ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद उसने चेतन से पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया। उसके मुताबिक, इस सवाल से चेतन नाराज हो गया और उसे चुप रहने के लिए कहा गया।
गवाह का दावा है कि उसे ये भी धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसे भी किले से नीचे फेंक दिया जाएगा। डर के कारण उसने तत्काल अपने दोस्तों या परिवार को घटना के बारे में नहीं बताया।
गवाह के अनुसार, घर लौटने के बाद उसकी तबीयत भी खराब हो गई और उसे बुखार तथा शरीर में दर्द की शिकायत हुई।
एक और गवाह ने भी हुडी का किया जिक्र
जांच में एक अन्य व्यक्ति का बयान भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस व्यक्ति ने भी किले पर चढ़ते समय चेतन को हुडी पहने देखा था और गर्मी में हुडी पहनने को लेकर उससे सवाल किया था।
इस तरह हुडी का जिक्र एक से अधिक गवाहों के बयानों में सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस इन बयानों को मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर जांच कर रही है।
12 TB से ज्यादा डिजिटल डेटा की जांच
केतन अग्रवाल केस की जांच केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तक सीमित नहीं है। पुलिस डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने करीब 12 TB डिजिटल डेटा खंगाला है। इसमें कई मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, बैकअप, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और डिलीट किए गए चैट शामिल हैं। फोरेंसिक जांच के दौरान कुछ डिलीट डेटा को रिकवर किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने दाखिल की 5,053 पन्नों की चार्जशीट
केतन अग्रवाल की मौत 18 जून 2026 को लोहगढ़ किले में हुई थी। शुरुआत में इस घटना को किले से गिरने का मामला माना गया था। बाद की जांच में पुलिस ने इसे कथित हत्या की साजिश से जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।
पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में 5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। मामले में सिया गोयल, चेतन चौधरी और रितेश हांगे को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले से जुड़े कई पहलुओं को जांच में शामिल किया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस की जांच के अनुसार, केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में हादसा माना गया था। बाद में जांच के दौरान सामने आए बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस ने हत्या की साजिश के एंगल से जांच की।
अब चश्मदीद गवाह का बयान इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर सामने आया है। हालांकि, गवाह के आरोपों और पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
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