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Israel-Iran war: ईरान में ‘मोजतबा युग’ की आहट, युद्ध की आग और उत्तराधिकार की जंग

Israel-Iran war
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Israel-Iran war: ईरान की राजनीति में एक नए दौर की आहट सुनाई दे रही है। रिपोर्टों के मुताबिक सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बाद सत्ता की बागडोर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के हाथों में जा सकती है, जिसकी तैयारी अंदरखाने तेज हो गई है। इसी बीच इजरायल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले की खबरों ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में जब क्षेत्र युद्ध के साये में है, ईरान के भीतर संभावित सत्ता परिवर्तन भविष्य की राजनीति और रणनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

सत्ता का नया केंद्र: मोजतबा खामेनेई का उदय
ईरान की राजनीति में दशकों से यह सवाल बना हुआ था कि अली खामेनेई के बाद देश की कमान किसके हाथ में होगी। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, विशेषज्ञों की परिषद (Assembly of Experts) ने गुप्त रूप से मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगा दी है।

  • खामोश ताकत: मोजतबा को ईरान की सुरक्षा और खुफिया तंत्र (विशेषकर ‘बसिज’ बल) पर गहरी पकड़ रखने वाला माना जाता है।
  • सार्वजनिक अनुपस्थिति: इजरायली हमलों और सुरक्षा चिंताओं के कारण वे फिलहाल सार्वजनिक मंचों से दूर हैं। माना जा रहा है कि उन्हें किसी अति-सुरक्षित स्थान (Safe House) पर रखा गया है ताकि सत्ता हस्तांतरण में कोई बाधा न आए।
  • घोषणा का समय: रिपोर्टों का दावा है कि उनके नाम की आधिकारिक घोषणा वर्तमान सर्वोच्च नेता के निधन के बाद की जाएगी, ताकि संवैधानिक और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

इजरायल पर ‘महाप्रलय’ जैसा हमला
ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए इजरायल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। यह हमला केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि इजरायल के डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने वाला था।

  • मिसाइल और ड्रोन की बारिश: ईरान ने लगभग 500 बैलिस्टिक मिसाइलें और 2000 से अधिक ड्रोन दागकर इजरायल के एयर डिफेंस (आयरन डोम और एरो सिस्टम) को संतृप्त (Saturate) करने की कोशिश की।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: इस हमले ने न केवल इजरायल बल्कि लेबनान, सीरिया और इराक के आसमान में भी युद्ध का साया फैला दिया है।

युद्ध के बीच राजनीतिक स्थिरता की चुनौती
ईरान के लिए यह समय दोहरा संकट लेकर आया है। एक तरफ बाहरी मोर्चे पर इजरायल के साथ सीधा युद्ध खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट है।

  • इब्राहिम रईसी की कमी: पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद, मोजतबा के लिए रास्ता और भी साफ हो गया है, क्योंकि रईसी को उत्तराधिकार की दौड़ में उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था।
  • जनता का रुख: ईरान की आम जनता और कट्टरपंथी गुटों के बीच मोजतबा की स्वीकार्यता भविष्य में ईरान की आंतरिक शांति के लिए निर्णायक होगी।

ईरान एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ उसके सैन्य फैसले क्षेत्र का भूगोल बदल सकते हैं और उसका नेतृत्व परिवर्तन देश का भविष्य। यदि मोजतबा खामेनेई कमान संभालते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने पिता की कट्टरपंथी नीतियों को आगे बढ़ाते हैं या युद्ध की विभीषिका के बीच कूटनीति का कोई नया रास्ता चुनते हैं।

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