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अमेरिकी हमले में डूबे ईरानी युद्धपोत को लेकर S. Jaishankar ने कहा – गलत वक्त पर गलत जगह फंस गया जहाज

जयशंकर
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हिंद महासागर में हाल ही में हुई एक बड़ी समुद्री घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमले में ईरान का एक जहाज डूब गया। इस घटना को लेकर भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरानी जहाज “गलत समय पर गलत जगह फंस गया।”

ये बयान उस समय आया जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

हिंद महासागर में हुआ हमला

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाते हुए टॉरपीडो से हमला किया। हमले के बाद जहाज समुद्र में डूब गया। बताया जा रहा है कि उस समय जहाज पर कई नौसैनिक मौजूद थे और इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ को बचा लिया गया।

ये घटना समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

भारत से लौट रहा था ईरानी जहाज

जानकारी के मुताबिक ये ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारत आया था। जहाज भारत में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में शामिल हुआ था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वो ईरान लौट रहा था।

इसी दौरान हिंद महासागर में श्रीलंका के आसपास के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उस पर हमला हुआ। इस घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।

जयशंकर की प्रतिक्रिया

दिल्ली में आयोजित वैश्विक सम्मेलन Raisina Dialogue के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस घटना को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि जब ईरानी जहाज भारत आए थे तब परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल गए।

उन्होंने कहा कि जहाज ऐसे समय और स्थान पर पहुंच गया जहां परिस्थितियां अचानक बिगड़ गईं। इसी कारण वह इस घटना का शिकार बन गया।

मानवीय आधार पर दी गई मदद

इस घटना के बाद एक अन्य ईरानी जहाज ने भारत से सहायता की मांग की थी। भारतीय अधिकारियों ने मानवीय आधार पर उसे भारतीय बंदरगाह पर आने की अनुमति दी। भारत ने हमेशा समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है।

बढ़ते वैश्विक तनाव की झलक

विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि ये दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत भी है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर अब समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

हिंद महासागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन सकती हैं।

फिलहाल इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है और कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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