महाराष्ट्र के किसानों के बाद अब राज्य के मछुआरों को भी कर्जमाफी का लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। महायुति सरकार ने मत्स्य व्यवसाय से जुड़े किसानों और व्यावसायिक मछुआरों के कर्ज की स्थिति की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि कितने मछुआरे कर्ज के बोझ में हैं और उन्हें कर्जमाफी का लाभ देने के लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी।
मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने उठाया है। मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद संबंधित विभागों को मछुआरों, मत्स्य किसानों और उनके कर्ज से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं।
करीब 19 हजार मछुआरे कर्ज के दायरे में
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में करीब 19 हजार मत्स्य किसान और व्यावसायिक मछुआरे कर्ज के बोझ में हैं। इन पर कुल मिलाकर लगभग 80.87 करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है।
इनमें से करीब 9,900 मछुआरों ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से कर्ज लिया है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों को कामकाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वर्किंग कैपिटल के तौर पर 5 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाता है।
सरकार अब ये जानकारी जुटा रही है कि इन कर्जों में से कितना हिस्सा कर्जमाफी के दायरे में लाया जा सकता है और इसके लिए सरकारी खजाने पर कितना वित्तीय भार पड़ेगा।
नितेश राणे को मिली जिम्मेदारी
मछुआरों की कर्जमाफी का प्रस्ताव मंत्री नितेश राणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखा था। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी नितेश राणे को दी है।
इसके बाद मत्स्य व्यवसाय विभाग को मछुआरों के कर्ज, कर्ज की राशि और अन्य जरूरी आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में सहकार विभाग के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
सरकार की योजना है कि आवश्यक जानकारी और आंकड़े जुटाने के बाद मछुआरों की कर्जमाफी से जुड़ा प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाए। हालांकि, अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही होगा।
बारिश के दौरान मछुआरों को 20 हजार रुपये की मदद का प्रस्ताव
कर्जमाफी के अलावा सरकार मछुआरों को बारिश के मौसम में आर्थिक सहायता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। दरअसल, बारिश के दौरान एक निर्धारित अवधि में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस अवधि में मछुआरों की आय प्रभावित होती है।
इसी को देखते हुए राज्य सरकार आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मछुआरा परिवारों को आर्थिक सहायता देने की योजना पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, राज्य के 8,829 मछुआरा परिवारों को 20-20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा सकती है।
इस योजना को लागू करने के लिए करीब 17 करोड़ 65 लाख 40 हजार रुपये की जरूरत होने का अनुमान है।
मौजूदा सहायता से कई गुना बढ़ सकती है रकम
फिलहाल पात्र मछुआरों को केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी के तहत सालाना 4,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। अब बढ़ती महंगाई और बारिश के दौरान होने वाली आय की कमी को देखते हुए इस राशि को बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो प्रतिबंध की अवधि के दौरान मछुआरा परिवारों को पहले की तुलना में काफी अधिक आर्थिक राहत मिल सकेगी।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
मछुआरों की कर्जमाफी और आर्थिक सहायता बढ़ाने से जुड़े दोनों प्रस्ताव अभी प्रक्रिया के स्तर पर हैं। कर्जमाफी के लिए पहले मछुआरों और उनके कर्ज का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाएगा, जबकि आर्थिक सहायता बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी सरकार को अंतिम निर्णय लेना है।
अगर मंत्रिमंडल से कर्जमाफी के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो महाराष्ट्र के हजारों मछुआरों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, 20 हजार रुपये की सहायता का प्रस्ताव मंजूर होने पर बारिश के दौरान आय प्रभावित होने वाले मछुआरा परिवारों को भी अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिलेगा।
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